तुलशी विवाह, देव उठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी या देव उत्थान एकादशी) क्यों-कैसे मनाई जाती है, क्या विधि और लाभ…जाने पूरी जानकारी

तुलशी विवाह, देव उठनी एकादशी : जिसे प्रबोधिनी एकादशी या देव उत्थान एकादशी भी कहा जाता है सुख-समृद्धि का पर्व हिंदू माह कार्तिक के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में आती है। 2024 में देव उठनी एकादशी 11 नवंबर को मनाई जाएगी।

देव उठनी एकादशी क्यों मनाई जाती है : जाने 

• भगवान विष्णु के जागरण का पर्व : हिंदू धर्म के अनुसार, भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी (आषाढ़ माह की एकादशी) पर योग निद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद देव उठनी एकादशी पर जागते हैं। इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है।

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• मांगलिक कार्यों का आरंभ : चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। भगवान विष्णु के जागने के साथ ही इन शुभ कार्यों का आरंभ फिर से हो जाता है।

• तुलसी विवाह : देव उठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह भी मनाया जाता है। इस दिन तुलसी (पवित्र तुलसी पौधे) का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम या श्रीकृष्ण रूप से कराया जाता है। तुलसी विवाह का आयोजन विवाह का शुभारंभ करने का प्रतीक माना जाता है।

कैसे मनाते हैं : देव उठनी एकादशी की पूजा 

इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं और विशेष मंत्रों का जाप करते हैं। देव उठनी एकादशी को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है और इस दिन भगवान से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है।

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