Udaipur News : मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, जो शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान रखता है, आज वहां के संविदा/एस.एफ.एस. कर्मचारियों की आवाज़ को नजरअंदाज किया जा रहा है।
Udaipur : विश्वविद्यालय कर्मचारियों का धैर्य अब टूटता नजर आ रहा है
कर्मचारी संगठन ने अब सीधा रुख माननीय कुलाधिपति की ओर किया है और समस्याओं को लेकर समय मांगा है, ताकि वर्षों से लंबित मुद्दों पर ध्यान दिया जा सके।
ईमेल के माध्यम से लगाई गुहार
इससे पहले भी 28 जुलाई, 2025 को ईमेल द्वारा माननीय कुलाधिपति से मिलने के लिए समय मांगा गया था, क्योंकि वे उदयपुर प्रवास पर थे।
लेकिन समय नहीं मिल पाने के कारण, संगठन ने 30 जुलाई को पुनः ईमेल भेजकर आग्रह किया कि उन्हें मिलने का समय दिया जाए, जिससे वे स्ववित्त पोषित सलाहकार बोर्ड के तहत कार्यरत कर्मचारियों की समस्याएं सामने रख सकें।
कौन हैं ये कर्मचारी?
यह कर्मचारी वर्ग विश्वविद्यालय में स्ववित्त पोषित सलाहकार मंडल (SFS Advisory Board) के अंतर्गत वर्षों से कार्यरत हैं, लेकिन संविधानिक अधिकारों, मानदेय और सम्मान की दृष्टि से उपेक्षित हैं।
इनकी आवाज़ ना केवल विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनसुनी की है, बल्कि अब पुलिस और अन्य प्रशासनिक इकाइयाँ भी सवालों के घेरे में हैं।
संगठन की प्रमुख 5 मांगें:
वित्तीय स्वीकृति आदेश तत्काल जारी हो
संगठन का कहना है कि 1 जुलाई से 31 दिसम्बर 2025 तक के लिए प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति के आदेश अब तक लंबित हैं।
राज्य सरकार से पहले ही स्वीकृति पत्र प्राप्त हो चुका है, फिर भी आदेश क्यों नहीं जारी हुए — यह बड़ा सवाल है।
मानदेय में वार्षिक 10% वृद्धि की जाए
दो वर्षों से संविदा और SFS कर्मचारियों के मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
संगठन ने मांग की है कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 10% वेतन वृद्धि स्वचालित रूप से लागू की जाए।
महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश का अधिकार
पूर्व में महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश की स्वीकृति दी जाती थी, लेकिन अब उस पर भी रोक है।
संगठन ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पहले जैसी मानवता और सहानुभूति से काम ले।
श्रीमती किरण कंवर को पुनः कार्यादेश जारी किया जाए
श्रीमती किरण कंवर को पिछले 3 माह से कोई कार्यादेश नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और आत्मसम्मान दोनों पर असर पड़ा है।
संगठन ने उनके लिए पुनः कार्यादेश की मांग की है।
दिवंगत श्री प्रकाश नागदा को मुआवजा और परिवार को नौकरी
श्री प्रकाश नागदा, जिन्होंने 20 वर्षों तक विश्वविद्यालय में सेवा दी, का कार्यस्थल पर मानसिक तनाव के चलते निधन हो गया।
उनके परिवार को मुआवजा और पत्नी या पुत्र को नौकरी देने की मांग की गई है, जिससे उनका भरण-पोषण जारी रह सके।
जातिगत उत्पीड़न और महिला असुरक्षा पर गंभीर आरोप
किरण कंवर के साथ हुआ अभद्र व्यवहार
21 जुलाई 2025 को कर्मचारी श्रीमती किरण कंवर के साथ विश्वविद्यालय परिसर में अभद्र भाषा और व्यवहार किया गया, जो किसी भी कार्यस्थल के लिए शर्मनाक है।
बेबी गमेती के साथ जातिगत गाली और मारपीट
यही नहीं, कर्मचारी श्रीमती बेबी गमेती के साथ जातिगत गाली-गलौज और शारीरिक मारपीट तक हुई।
इस मामले को लेकर प्रतापनगर थाने में परिवाद दर्ज किया गया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
सवाल उठाता है पुलिस और प्रशासन का मौन
इस मामले में अभी तक कोई पुलिस कार्रवाई नहीं होना, यह बताता है कि कहीं ना कहीं प्रशासन किसी के दबाव में काम कर रहा है।
क्या विश्वविद्यालय में कार्यरत संविदा महिला कर्मचारी इस तरह असहाय रहेंगी?
नारायण लाल सालवी ने क्या कहा?
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय संविदा/एस.एफ.एस. कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष नारायण लाल सालवी ने बताया:
“हम अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक धरने पर बैठे, प्रशासन से वार्ता की, अब कुलाधिपति से मिलने की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।”
उनका कहना है कि अगर जल्द कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्राउंड रिएक्शन: कर्मचारियों में आक्रोश, असुरक्षा की भावना
यूनिवर्सिटी परिसर में काम करने वाले अन्य संविदा कर्मचारियों ने बताया कि अब वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
- “अगर महिला कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो हम किस पर भरोसा करें?”
- “हम काम तो बराबरी से करते हैं, लेकिन अधिकार देने में भेदभाव क्यों?”
प्रशासन की चुप्पी पर सोशल मीडिया भी हुआ सक्रिय
इस मुद्दे को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी #SFSJustice #SukhadiyaUniversityProtest जैसे हैशटैग चलने लगे हैं।
छात्रों और पूर्व कर्मचारियों ने भी प्रशासन से شفافता और जवाबदेही की मांग की है।
निष्कर्ष: कब सुनी जाएगी संविदा कर्मचारियों की आवाज?
जयपुर, कोटा, जोधपुर जैसे अन्य विश्वविद्यालयों में संविदा कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लिया गया, लेकिन उदयपुर में प्रशासन की चुप्पी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखना होगा कि क्या माननीय कुलाधिपति संविदा कर्मचारियों को मिलने का समय देंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे या फिर यह संघर्ष और लंबा खिंचेगा?











