Bikaner News : सावन मास के पवित्र अवसर पर शिव बाड़ी स्थित जोत भारती के धोरे पर आयोजित शिव पुराण कथा के चौथे दिन भक्ति, श्रद्धा और शांति का अनुपम संगम देखने को मिला।
बीकानेर में शिव पुराण कथा का चौथा दिन: भक्ति और अध्यात्म से सराबोर रहा वातावरण
इस अवसर पर कथा स्थल पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और प्रसिद्ध कथा वाचक पूज्य संतोष सागर जी महाराज की संगीतमय कथा का रसपान किया।
पूज्य संतोष सागर जी महाराज का कथन: Bikaner
“जो भक्त शिव विवाह की कथा श्रद्धापूर्वक सुनता है, उसका दांपत्य जीवन सुखमय और प्रेमपूर्ण बनता है।”
पूज्य महाराज ने कहा कि भगवान शिव की लीलाएं अलौकिक, रहस्यमय और जीवन को दिशा देने वाली होती हैं।
सावन मास जैसे पुण्य अवसर पर शिव कथा का श्रवण करना मनुष्य जीवन को सार्थक बनाता है।
कथा में हुआ शिवलिंग, रुद्राक्ष और कुबेर चरित्र का विस्तार
पूज्य संतोष सागर जी महाराज ने इस दिन की कथा में श्रद्धालुओं को शिवलिंग की महिमा, रुद्राक्ष की शक्ति, भस्म के आध्यात्मिक रहस्य, ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना, और कुबेर के चरित्र से अवगत कराया।
उन्होंने बताया:
“शिवलिंग केवल पूजा का प्रतीक नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा का केन्द्र है। रुद्राक्ष पहनने से नकारात्मकता दूर होती है और भस्म से आत्मा शुद्ध होती है।”
ब्रह्मपुत्र दक्ष के जीवन से प्रेरणा
कथा में ब्रह्मा के पुत्र दक्ष प्रजापति का विशेष उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि:
“दक्ष का अर्थ होता है — दक्षता से युक्त। वे इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाले, अनुशासित और विद्वान थे।”
दक्ष की कथा से वर्तमान जीवन में संयम, कर्तव्यबोध और भक्ति के महत्व को समझाया गया।
पार्वती जी और शिव विवाह की भावुक कथा
महाराज ने पार्वती जी के तप, उनकी भक्ति, और शिव विवाह की कथा को इस तरह सुनाया कि पूरा पांडाल भावविभोर हो गया।
उन्होंने कहा:
“पार्वती जी का दूसरा नाम ‘शिवा’ था। उन्होंने जिस समर्पण से शिव को पाया, वह आज के जीवन में भी प्रेम, निष्ठा और संयम का संदेश देता है।”
श्री नारायण भारती जी महाराज ने क्या कहा?
ज्योत भारती पर आयोजित शिव कथा के इस आयोजन में उपस्थित श्री नारायण भारती जी महाराज ने कहा:
“श्रावण मास भक्तों को अपने आराध्य शिव से जुड़ने का सुनहरा अवसर देता है। यह कथा न केवल आध्यात्मिक शांति देती है, बल्कि आत्मा को ऊर्जा भी प्रदान करती है।”
आयोजन के संयोजक नित्यानंद पारीक ने दी जानकारी
इस आयोजन के संयोजक समाजसेवी नित्यानंद पारीक ने बताया:
“बीकानेर के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों से भी सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन कथा स्थल पर पहुंच रहे हैं। कथा के दौरान वातावरण शिवमय हो जाता है।”
उन्होंने बताया कि भक्त सुबह से ही पूजन-अर्चन और भजन कीर्तन में रम जाते हैं और कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण करते हैं।
गौ सेवा का संदेश भी कथा में समाहित
इस आयोजन में ‘गौ धन मित्र’ महेंद्र जोशी ने भी गाय के गोबर से निर्मित शिव प्रतिमा और गाय माला की विशेष जानकारी दी।
उनका उद्देश्य था — “गौ सेवा को जीवन का अंग बनाएं और गौ आधारित उत्पादों से समाज को जोड़ें।”
शिव विवाह कथा: दांपत्य जीवन की सफलता का आध्यात्मिक सूत्र
पूज्य संतोष सागर जी महाराज ने बार-बार यह दोहराया कि:
“जो व्यक्ति शिव विवाह की कथा प्रेम और श्रद्धा से सुनता है, उसके जीवन में सौहार्द्र, प्रेम, सहनशीलता और सम्मान बढ़ता है, जो सुखी वैवाहिक जीवन की नींव है।”
कथा स्थल पर भजन-कीर्तन और शिव स्तुति
कथा के दौरान बीच-बीच में संगीतमय शिव भजन, रुद्राष्टक, और शिव तांडव स्तोत्र की प्रस्तुति ने माहौल को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
भक्तगण हर हर महादेव के जयकारों के साथ ताली और घंटी बजाते हुए वातावरण को ऊर्जावान बना रहे थे।
ग्रामीण श्रद्धालुओं में आयोजन को लेकर खास उत्साह
बीकानेर और आस-पास के ग्रामीण इलाकों से महिलाएं, वृद्धजन, युवा और बच्चे भी बड़ी संख्या में कथा स्थल पर पहुंच रहे हैं।
कई परिवार तो कथा स्थल पर ही दिन भर रुकते हैं, पूजन करते हैं और फिर भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट: कथा स्थल पर आस्था की उमंग
कथा स्थल को फूलों, ध्वजों और रुद्राक्ष मालाओं से सजाया गया है।
भक्त शिव वेशभूषा में सजकर फोटो भी खिंचवा रहे हैं।
सेवा समिति द्वारा जलपान, बैठने की उत्तम व्यवस्था और भंडारे की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
निष्कर्ष: सावन में शिव कथा — आत्मा का पुनर्जागरण
बीकानेर के ज्योत महाराज धोरे पर चल रही शिव पुराण कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली एक आध्यात्मिक यात्रा है।
पूज्य संतोष सागर जी महाराज की वाणी और भक्ति रस ने श्रद्धालुओं को शिव तत्व से जोड़ दिया है।
सावन मास के ये दिन निश्चित ही उन भक्तों के लिए विशेष हैं, जो शिव विवाह कथा के माध्यम से अपने वैवाहिक जीवन में शुभता, सौम्यता और स्थिरता लाना चाहते हैं।











