Rajathan News : जयपुर/नागौर। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को 2 दिन में तीन बड़े झटके लगे — पहले बिजली कटी, अब जयपुर के दोनों सरकारी विधायक आवास खाली करने का नोटिस थमा दिया गया। पढ़ें पूरी खबर।
राजस्थान की राजनीति में तेज-तर्रार छवि के लिए पहचाने जाने वाले सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल को बीते दो दिनों में झटके पर झटका लग रहा है। पहले नागौर स्थित उनके आवास की बिजली काटी गई, फिर जयपुर के दोनों विधायक आवासों को खाली करने का नोटिस थमा दिया गया। इसके साथ ही उनके भाई और पूर्व विधायक नारायण बेनीवाल को भी सरकारी क्वार्टर खाली करने के आदेश मिले हैं। यह घटनाक्रम तब हुआ है जब बेनीवाल 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस समर्थन से सांसद बने हैं।
पहली चोट: बिजली का कनेक्शन कटा
मंगलवार को नागौर स्थित हनुमान बेनीवाल के घर की बिजली 11 लाख रुपये के बकाया बिल के कारण विद्युत विभाग द्वारा काट दी गई। इससे इलाके में हलचल मच गई और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई।
दूसरी चोट: सरकारी आवास खाली करने का नोटिस
इसके बाद जयपुर में उनके नाम पर आवंटित दोनों विधायक आवासों को खाली करने का आदेश जारी हुआ। इन आवासों में से एक जालूपुरा स्थित पुराना आवास है और दूसरा विधानसभा के पास बना नया फ्लैट। हैरानी की बात यह है कि हनुमान बेनीवाल सांसद बन चुके हैं और विधायक नहीं हैं, फिर भी अब तक ये दोनों सरकारी आवास उनके कब्जे में हैं।
तीसरी चोट: भाई को भी नोटिस
केवल हनुमान बेनीवाल ही नहीं, बल्कि उनके छोटे भाई नारायण बेनीवाल और RLP के पूर्व विधायक पुखराज गर्ग को भी 11 जुलाई तक सरकारी फ्लैट खाली करने का अल्टीमेटम जारी किया गया है।
क्या कहती है सरकारी प्रक्रिया?
राज्य सम्पदा विभाग और एडीएम (ज्यूडिशियल) की ओर से सभी को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि आवास तय समय पर खाली नहीं किए गए तो उन्हें बेदखल किया जा सकता है।
Rajathan News : क्यों हैं दो आवास?
हनुमान बेनीवाल पहले चार बार नागौर जिले की खींवसर विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। वे एक बार बीजेपी, एक बार निर्दलीय और दो बार RLP के टिकट पर जीते थे। सांसद बनने के लिए उन्होंने दो बार विधायक पद छोड़ा था।
पहली बार सीट छोड़ी तो उन्होंने अपने भाई नारायण बेनीवाल को विधायक बनाया और दूसरी बार पत्नी कनिका बेनीवाल को मैदान में उतारा, जो चुनाव हार गईं।
क्या यह राजनीतिक दबाव है?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह घटनाक्रम केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी हो सकता है। चूंकि हनुमान बेनीवाल ने NDA छोड़कर UPA में शामिल होकर 2024 लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस के समर्थन से सांसद बने, इसलिए यह घटनाक्रम सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
बेनीवाल की प्रतिक्रिया
हनुमान बेनीवाल की ओर से अब तक इस मामले पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन उनके करीबियों का कहना है कि यह सब एक सुनियोजित योजना का हिस्सा है ताकि RLP को कमजोर किया जा सके।
जनता क्या कह रही है?
सोशल मीडिया पर लोग इस घटनाक्रम को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक बदले की भावना से जोड़कर देख रहे हैं।
निष्कर्ष :
हनुमान बेनीवाल जैसे तेजस्वी नेता को दो दिन में तीन बड़े झटकों का सामना करना, राजस्थान की राजनीति में एक नया मोड़ साबित हो सकता है। सवाल यह है कि क्या यह प्रशासनिक कार्रवाई है या राजनीतिक बदले की शुरुआत?
आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि RLP प्रमुख इसका किस तरह जवाब देते हैं।











