Rajasthan News : राजस्थान के उदयपुर आर्ट्स कॉलेज में बड़ा हादसा टला: मनोविज्ञान विभाग की छत गिरी, बाल-बाल बचे शिक्षक और छात्र

Rajasthan News Today : राजस्थान के उदयपुर मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय (आर्ट्स कॉलेज), उदयपुर में मनोविज्ञान विभाग की छत गिरने की घटना से बड़ा हादसा टल गया। जानिए पूरी खबर और प्रशासन की प्रतिक्रिया।

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय (आर्ट्स कॉलेज), उदयपुर में बुधवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मनोविज्ञान विभाग के एक कक्ष की छत अचानक भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि उस वक्त कमरे में कोई छात्र या शिक्षक मौजूद नहीं था, जिससे किसी की जान नहीं गई। यह घटना कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था और भवन की दशा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

Rajasthan News : हादसे का विवरण

मामला आर्ट्स कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग से जुड़ा है, जहां लंबे अवकाश के बाद बुधवार को सभी शिक्षक और छात्र वापस कॉलेज लौटे थे। उसी दिन दोपहर में अचानक कमरे की छत गिर गई। बताया जा रहा है कि जिस कमरे की छत गिरी, उसमें कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य ऑफिस फर्नीचर मौजूद था जो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

छत गिरने से ठीक पहले एक महिला कर्मचारी वहां सफाई का काम कर रही थी। जैसे ही वह कमरे से बाहर निकली, कुछ ही क्षणों में छत भरभराकर नीचे गिर पड़ी। अगर कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो यह एक बड़ा हादसा साबित हो सकता था।

डॉ. हेमा मेहर का ऑफिस था कमरा

यह कमरा मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हेमा मेहर का था। छत गिरने के बाद कॉलेज प्रशासन ने कमरा नंबर 185, 186 और 187 को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है और इन पर ताले लगा दिए गए हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और मीडिया में किसी प्रकार की नकारात्मक खबर फैलने से रोका जा सके।

10 दिन में दूसरी बड़ी घटना

गौर करने वाली बात यह है कि यह कॉलेज परिसर में पिछले 10 दिनों में दूसरी बड़ी सुरक्षा संबंधित घटना है। इससे पहले भी एक अन्य कक्ष में प्लास्टर गिरने की घटना सामने आ चुकी है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि कॉलेज भवन की मरम्मत और सुरक्षा मानकों की समीक्षा अत्यंत आवश्यक है।

कॉलेज प्रशासन का रुख

सूत्रों के अनुसार, कॉलेज प्रशासन ने मामले को दबाने का प्रयास किया है ताकि यह घटना स्थानीय समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों की सुर्खियों में न आए। इसलिए जिन कमरों में संरचनात्मक कमजोरी पाई गई है, उन्हें सील कर दिया गया है। फिलहाल कोई आधिकारिक बयान कॉलेज प्रशासन की ओर से जारी नहीं किया गया है।

भवन की स्थिति पर उठे सवाल

कॉलेज के कुछ कर्मचारियों और छात्रों ने अनौपचारिक रूप से बताया कि कई वर्षों से कॉलेज भवन की स्थिति जर्जर होती जा रही है। बारिश और समय-समय पर होने वाली सफाई की कमी के कारण दीवारों में सीलन और प्लास्टर झड़ने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। लेकिन इस ओर न तो विश्वविद्यालय प्रशासन और न ही तकनीकी विभाग ने कोई गंभीर कदम उठाया है।

भविष्य में बड़ा हादसा संभव?

भले ही इस बार कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना एक चेतावनी है। यदि जल्द ही भवन की मरम्मत और निरीक्षण नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसा हादसा और भी भयावह रूप ले सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कॉलेज जैसे सार्वजनिक संस्थानों में हर साल नियमित संरचनात्मक ऑडिट और सुरक्षा निरीक्षण होना चाहिए।

शिक्षक और कर्मचारी मांग कर रहे हैं कार्रवाई की

मनोविज्ञान विभाग सहित कई अन्य विभागों के शिक्षक और कर्मचारी इस घटना के बाद चिंतित हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से भवन की मरम्मत, पुनर्निर्माण और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की मांग की है। साथ ही, यह भी आग्रह किया गया है कि भविष्य में कोई भी कक्षा या कार्यालय पुराने और जर्जर भवनों में संचालित न किया जाए।

निष्कर्ष:

आर्ट्स कॉलेज, उदयपुर में मनोविज्ञान विभाग की छत गिरने की घटना किसी बड़े हादसे की चेतावनी थी, जिससे इस बार तो बाल-बाल बचा गया, लेकिन अगली बार किस्मत साथ देगी या नहीं, इसका भरोसा नहीं किया जा सकता। विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि इस घटना को नजरअंदाज करने के बजाय इसे एक अलार्म की तरह लें और जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करें।

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