Olive Ridley Turtles : ओडिशा के तटों पर कछुओं की बाढ़! समुद्र तट पर कछुओं का महाकुंभ 3 लाख से ज्यादा ऑलिव रिडले कछुए पहुंचे, वीडियो देख हो जाएंगे हैरान!

Olive Ridley Turtles

Viral Video : ओडिशा के गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य और ऋषिकुल्या बीच पर इस साल एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब करीब 3 लाख से ज्यादा ऑलिव रिडले कछुए (Olive Ridley Turtles) प्रजनन के लिए पहुंचे। इन कछुओं ने लाखों अंडे दिए, जिससे यह स्थान दुनिया के सबसे बड़े कछुआ प्रजनन स्थलों में से एक बन गया। इस अद्भुत नजारे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

कछुओं की ‘मास नेस्टिंग’ की अद्भुत घटना, लाखों अंडे देकर लौटे समुद्र में

हर साल, ऑलिव रिडले कछुए हजारों किलोमीटर की यात्रा कर अपने जन्मस्थल पर लौटते हैं और ‘अरिबाडा’ (Arribada) प्रक्रिया के तहत समूह में अंडे देते हैं। इस बार इनकी संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक देखी गई है। समुद्र से निकलकर, मादा कछुए रेत में गड्ढे खोदती हैं और 100 से 150 अंडे देकर वापस समुद्र में लौट जाती हैं।

ओडिशा प्रशासन ने की सुरक्षा व्यवस्था, आम लोगों की एंट्री बैन

कछुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ओडिशा वन विभाग और सरकार ने गहिरमाथा और ऋषिकुल्या समुद्र तटों पर विशेष निगरानी शुरू की है। यहां आम लोगों के जाने पर पाबंदी लगा दी गई है ताकि अंडों की सुरक्षा बनी रहे। इसके अलावा, वन्यजीव संरक्षण विभाग ने भी कछुओं की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं।

वीडियो हुआ वायरल, सोशल मीडिया पर उमड़ा लोगों का रिएक्शन

इस शानदार नजारे का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (Twitter) पर @gunsnrosesgirl3 नाम के अकाउंट से शेयर किया गया, जिसे लाखों लोग देख चुके हैं। वीडियो में समुद्र तट पर कछुओं की विशाल संख्या देखी जा सकती है। लोग इस वीडियो को देखकर प्राकृतिक संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहे हैं।

क्यों खास हैं ऑलिव रिडले कछुए?

  1. ऑलिव रिडले कछुए संरक्षित प्रजाति हैं और यह IUCN (International Union for Conservation of Nature) की रेड लिस्ट में आते हैं।
  2. ये कछुए अपने जन्मस्थान पर लौटकर ‘मास नेस्टिंग’ (Mass Nesting) प्रक्रिया के तहत हजारों की संख्या में अंडे देते हैं।
  3. इनकी प्रजनन दर बेहद संवेदनशील होती है, क्योंकि केवल 1% से कम बच्चे ही समुद्र में जीवित बच पाते हैं।
  4. समुद्री प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे और जलवायु परिवर्तन की वजह से इनकी संख्या घट रही है।

हर साल हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं ये कछुए

ये कछुए प्राकृतिक नेविगेशन का इस्तेमाल कर हर साल हजारों किलोमीटर का सफर तय करके ओडिशा पहुंचते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये कछुए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) की मदद से अपना रास्ता तय करते हैं।

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