Ayurvedic Healthy Tips: तुलसी के सेवन से जीवन में कई रोगों का हल ही नहीं बल्कि लम्बी दीर्घायु और एक स्वस्थ जीवन भी मिलता है जिसमें आपका जीवन बेहद सुखी और कार्यशाली होकर बिना किसी छोटी-बड़ी बीमारी के जीवन जिएँगे..आइए जानते है कैसे…पढ़े पूरा. Ayurvedic Healthy Tips
Ayurvedic Healthy Tips: सर्दियों में उपयोगी पुष्टि व शक्तिवर्धक प्रयोग?
125 ग्राम देशी काले चने धोकर रात को 125 मि.ली. पानी में भिगो दें । सुबह इन चनों को खूब चबा – चबाकर खायें, साथ में किशमिश भी खा सकते हैं । ऊपर से चने के पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पी जायें । शरीर बलवान व शक्तिशाली होता है तथा वीर्य पुष्ट होता है ।
50 ग्राम गोंद को घी में तल लें । 50 – 50 ग्राम अजवायन, काले तिल व मूँगफली के दानों को अलग – अलग भूनकर सभीको कूट लें । फिर इस मिश्रण को तथा किसे हुए 50 ग्राम सूखे नारियल (खोपरा) को 750 ग्राम गुड़ में मिला के रख लें । सुबह खाली पेट 50 ग्राम मिश्रण खूब चबा – चबाकर खायें ।इसके 1 – 2 घंटे बाद हलका सुपाच्य भोजन करें । इससे शरीर पुष्ट होता है, बल-वीर्य की वृद्धि होती है । वायुरोग, बहुमुत्रता व बच्चों की बिस्तर में पेशाब करने की समस्या में भी लाभ होता है। – (लोक कल्याण सेतु – दिसम्बर 2016 से Ayurvedic Healthy Tips)
Healthy Tips: जकड़ाहट, आमवात, जोड़ों का दर्द आदि हो तो करे सेवन
शरीर जकड़ा हुआ है, आमवात, जोड़ो का दर्द, घुटनों का दर्द आदि कि शिकायत ज्यादा है तो भोजन के समय १ गिलास गुनगुना पानी रखो । उसमें अदरक के रस की 10-12 बुँदे डाल दो अथवा चौथाई ग्राम ( 1 चनाभर) सौंठ-चूर्ण मिला दो । भोजन के बीच-बीच में 2 – 2 घूँट वह पानी पियो ।
80 ग्राम लहसुन कि कलियाँ कूट के 100 ग्राम अरंडी के तेल में डाल दें और गर्म करें । कलियाँ जल जायें तो वह तेल उतार के रख लें । इससे घुटनों को, जोड़ों को मालिश करने से फायदा होता है।Ayurvedic Healthy Tips
Ayurvedic Healthy Tips: तुलसी सेवन से मिले दीर्घायुष्य व स्वास्थ्य?
- तुलसी शारीरिक व्याधियों को तो दूर करती ही है, साथ ही मनुष्य के आंतरिक भावों और विचारों पर भी कल्याणकारी प्रभाव डालती है । ‘अथर्ववेद’ में आता है यदि त्वचा, मांस तथा अस्थि में महारोग प्रविष्ट हो गया तो उसे श्यामा तुलसी नष्ट कर देती है ।
- प्रात: काल खाली पेट दो–तीन चम्मच तुलसी रस सेवन करने से शारीरिक बल एवं स्मरणशक्ति में वृद्धि के साथ–साथ व्यक्तित्व भी प्रभावशाली होता है ।Ayurvedic Healthy Tips
- दोपहर भोजन के पश्चात तुलसी – पत्ते चबाने से पाचनशक्ति मजबूत होती है । दूषित पानी में तुलसी के कुछ ताजे पत्ते डालने से पानी का शुद्धिकरण किया जा सकता है ।
- बर्रे, भौंरा, बिच्छू ने काटा हो तो उस स्थान पर तुलसी के पत्ते का रस लगाने या तुलसी-पत्ता पीसकर पुलटिस बाँधने से जलन व सूजन नहीं होती है ।
- तुलसी के बीज बच्चों को भोजन के बाद देने से मुखशुद्धि होने के साथ–साथ पेट के कृमि भी मर जाते हैं । तुलसी बीज नपुंसकता को नष्ट करते हैं और पुरुषत्व के हार्मोन्स की वृद्धि भी करते हैं ।
- शास्त्रों में आता है कि जिनके घर में लहलहाता तुलसी का पौधा रहता है, उनके यहाँ वज्रपात नहीं हो सकता अर्थात जब तुलसी अचानक प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाय तब समझना चाहिए कि घर पर कोई भारी संकट आनेवाला है ।
- बच्चों को तुलसी – पत्र देने के साथ सूर्यनमस्कार करवाने और सूर्य को अर्घ्य दिलवाने के प्रयोग से बुद्धि में विलक्षणता आती है । तुलसी की क्यारी के पास प्राणायाम करने से सौन्दर्य, स्वास्थ्य और तेज की अत्युत्तम वृद्धि होती है ।
- अपने घर के ईशान कोण में तुलसी-पौधा अवश्य होना चाहिए । प्रात: स्नानादि के बाद उसमें शुद्ध जल चढ़ाने तथा शाम के समय घी या तेल का दीपक जलाने से वातावरण में विचरण करनेवाले विषैले जीवाणु समाप्त होते हैं तथा शुभत्व बढ़ता है ।
Ayurvedic Healthy Tips: तुलसी की जीवन में महत्ता व उपयोगिता है इतनी आवश्यक
- ‘स्कंद पुराण’ (का.खं. :21.66) में आता है : ‘जिस घर में तुलसी – पौधा विराजित हो, लगाया गया हो, पूजित हो, उस घर में यमदूत कभी भी नहीं आ सकते ।’
- जहाँ तुलसी – पौधा रोपा गया है, वहाँ बीमारियाँ नहीं हो सकतीं क्योंकि तुलसी – पौधा अपने आसपास के समस्त रोगाणुओं, विषाणुओं को नष्ट कर देता है एवं 24 घंटे शुद्ध हवा देता है। वहाँ निरोगता रहती है, साथ ही वहाँ सर्प, बिच्छू, कीड़े-मकोड़े आदि नहीं फटकते। इस प्रकार तीर्थ जैसा पावन वह स्थान सब प्रकार से सुरक्षित रहकर निवास-योग्य माना जाता है । वहाँ दीर्घायु प्राप्त होती है ।
- सुबह तुलसी के दर्शन करो। उसके आगे बैठ कर लम्बे श्वास लो और छोड़ो, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, दमा दूर रहेगा अथवा दमे की बीमारी की सम्भावना कम हो जायेगी। तुलसी को स्पर्श करके आती हुई हवा रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाती है और तमाम रोग व हानिकारक जीवाणुओं को दूर रखती है।’
- तुलसी रोपने तथा उसे दूध से सींचने पर स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। तुलसी की मिट्टी का तिलक लगाने से तेजस्विता बढ़ती है ।
- दूध के साथ तुलसी वर्जित है, बाकी पानी, दही, भोजन आदि हर चीज के साथ तुलसी ले सकतें हैं। रविवार को तुलसी ताप उत्पन्न करती है, इसलिए रविवार को तुलसी न तोड़ें, न खायें। 6 दिन तक तुलसी – पत्ते बासी नहीं माने जाते ।Ayurvedic Healthy Tips













