Viral Video – सोचिए कि आप सड़क पर खड़े लोगों से रास्ता मांगते हैं और बदले में आपको और आपके परिवार को बेरहमी से पीटा जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ डोंबिवली की पूनम गुप्ता के साथ, जिन्होंने सिर्फ इतना कहा – “Excuse me!” और इसके बाद जो हुआ, वो पूरे महाराष्ट्र को चौंका देने वाला है।
मामला जो बना बहस का मुद्दा
डोंबिवली पश्चिम के ओल्ड डोंबिवली स्थित गणेश श्रद्धा बिल्डिंग की निवासी पूनम गुप्ता अपनी एक सहेली के साथ रात करीब 9:30 बजे घर लौट रही थीं। बिल्डिंग के बाहर सड़क पर कुछ युवक खड़े थे, जिनसे रास्ता देने के लिए पूनम ने शालीनता से कहा – “Excuse me”। मगर यह एक साधारण वाक्य कुछ लोगों को नागवार गुज़रा।
उन युवकों ने तुरंत पलटकर कहा – “मराठी में बोलो!” और इसी बात पर शुरू हो गया विवाद, जो महज बहस तक सीमित नहीं रहा। देखते ही देखते युवक उग्र हो गए और पूनम गुप्ता व उनकी सहेली पर हाथ छोड़ दिया।
वायरल वीडियो ने खोली सच्चाई
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। ट्विटर हैंडल @MaharashtraNewschannel द्वारा शेयर किए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिला को थप्पड़ मारे जा रहे हैं और उसके साथ बदसलूकी की जा रही है।
वीडियो सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई नेटिज़न्स ने सवाल उठाया कि क्या अब किसी को अंग्रेज़ी बोलने की भी आज़ादी नहीं?
महिला का आरोप – परिवार को बेरहमी से पीटा गया
पूनम गुप्ता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि मारपीट सिर्फ वहीं नहीं रुकी। जब उनके परिवार के सदस्य बीच-बचाव करने आए तो हमलावरों ने उन्हें भी बेरहमी से पीटा।
उनके मुताबिक, रितेश ढबाले, बाबासाहेब ढबाले, अनिल पवार और उनकी पत्नी इस घटना में मुख्य आरोपी हैं। पूनम ने यह भी कहा कि हमलावरों ने उन्हें यह कहते हुए मारा – “अंग्रेजी नहीं, मराठी में बोलो।”
पुलिस की कार्रवाई शुरू
पूनम गुप्ता की शिकायत के आधार पर विष्णुनगर पुलिस स्टेशन में IPC की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई है। फिलहाल पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।
नामजद आरोपी:
- अनिल पवार
- बाबासाहेब ढबाले
- रितेश ढबाले
पुलिस के मुताबिक इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
भाषा पर बवाल – अब इंग्लिश भी विवाद में?
महाराष्ट्र में पहले से ही मराठी बनाम हिंदी विवाद चलता रहा है। अब इसमें अंग्रेजी की भी एंट्री हो गई है। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब आम लोगों को सार्वजनिक स्थान पर कोई भी भाषा बोलने का अधिकार नहीं है?
एक यूज़र ने लिखा –
“इसका नाम ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ है, न कि ‘भाषा की गुलामी।’”
वहीं एक अन्य यूज़र ने कहा –
“ये हमला सिर्फ महिला पर नहीं, हमारी स्वतंत्रता पर है।”
नेताओं और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं
इस मामले ने राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। महिला संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कड़ी निंदा की है। महाराष्ट्र महिला आयोग ने भी मामले पर स्वत: संज्ञान लेने की बात कही है।
सोशल मीडिया पर जनता की राय
जनता में गुस्सा:
- “क्या अब ‘Excuse me’ बोलना भी जुर्म हो गया?”
- “ये किस समाज की ओर बढ़ रहे हैं हम, जहां भाषा पर हिंसा हो रही है?”
- “राज्य सरकार को तुरंत इसपर सख्त एक्शन लेना चाहिए।”
कुछ लोग बोले – “राजनीतिक एजेंडा तो नहीं?”
वहीं कुछ लोगों ने इस घटना को राजनीतिक एंगल से भी जोड़ना शुरू कर दिया है। कुछ ने इसे मराठी अस्मिता बनाम शहरी संस्कृति के टकराव का रूप देना शुरू कर दिया है, जो हालात को और गंभीर बना सकता है।
सवाल जो अब उठने लगे हैं
- क्या सड़क पर खड़े युवकों को किसी महिला को मारने का अधिकार है, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने अंग्रेजी में बात की?
- क्या भाषा के नाम पर मारपीट को जायज़ ठहराया जा सकता है?
- क्या महाराष्ट्र में अब कोई भी भाषा बोलने की आज़ादी खतरे में है?
निष्कर्ष – एक खतरनाक ट्रेंड की शुरुआत?
यह घटना सिर्फ एक महिला पर हमला नहीं है, यह भारत की भाषाई सहिष्णुता पर एक सवाल है। यह एक संकेत है कि कहीं न कहीं, हमारे समाज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भाषाई विविधता को खतरा पैदा हो रहा है।
यह ज़रूरी है कि दोषियों को सख्त सज़ा मिले और सरकार यह सुनिश्चित करे कि भारत की सड़कों पर कोई भी महिला सिर्फ अपनी भाषा के कारण अपमानित या प्रताड़ित न हो।
Excuse Me बोलना पड़ गया भारी! डोंबिवली में महिला ने मांगा रास्ता, युवकों ने कर दी बेरहमी से पिटाई – देखें वायरल वीडियो और जानें पूरा मामला!













