Viral Video : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से एक बेहद चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल हो रहे इस वीडियो में एक बुजुर्ग महिला न्याय की उम्मीद लेकर सिविल लाइन सीओ अभय पांडे से मिलने पहुंचती है, लेकिन उसके साथ जो बर्ताव किया गया वह दिल दहला देने वाला है। महिला ने इंसाफ की गुहार लगाते हुए सीओ साहब के पैर छुए, मगर बदले में उसे फटकार और अपमान ही मिला।
यह घटना अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई है और लोगों के बीच आक्रोश की लहर दौड़ गई है। पुलिस की अमानवीयता और संवेदनहीनता पर लोग सवाल उठा रहे हैं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि आम जनता और खासकर महिलाओं को न्याय की गुहार लगाना आज भी आसान नहीं है।
Viral Video : क्या है पूरा मामला?
घटना अलीगढ़ के सिकंदराराऊ क्षेत्र के गोकुलपुर गांव की बताई जा रही है। यहां की एक बुजुर्ग महिला अपने पति और बेटे की गिरफ्तारी के खिलाफ न्याय की गुहार लेकर सिविल लाइन सीओ अभय पांडे से मिलने पहुंची थी। जानकारी के मुताबिक, महिला का पति और बेटा गाय चोरी के आरोप में जेल भेज दिए गए हैं। आरोप है कि राजकुमार नामक व्यक्ति ने सड़क पर घूम रही गाय को अपने घर बांध लिया, जिसकी शिकायत गाय के मालिक ने पुलिस से कर दी। इसके बाद सिविल लाइन थाने की पुलिस ने गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया।
इसी गिरफ्तारी के विरोध में महिला न्याय की उम्मीद लेकर अधिकारियों से गुहार लगाने पहुंची। लेकिन यहां जो हुआ उसने सबको चौंका दिया। महिला ने सीओ अभय पांडे के सामने उनके पैर छूकर विनती की कि उसके पति और बेटे को छोड़ दिया जाए, लेकिन सीओ ने उसे डांट लगाई और यह तक कह डाला कि “आप फुटेज देने का काम कर रही हैं।” वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिला को सबके सामने अपमानित किया गया और न्याय की जगह तिरस्कार मिला।
वायरल हुआ वीडियो, सोशल मीडिया पर आक्रोश
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर @bstvlive नाम के एक हैंडल से शेयर किया गया, जो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि महिला हाथ जोड़ रही है, पैर छू रही है और रो-रोकर विनती कर रही है, लेकिन सीओ साहब का व्यवहार बेहद कठोर और असंवेदनशील रहा।
लोग इस वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पुलिस के खिलाफ नाराजगी जाहिर की जा रही है। कई यूजर्स का कहना है कि अगर किसी बुजुर्ग महिला को इंसाफ मांगने पर फटकार ही मिले, तो ऐसे सिस्टम से क्या उम्मीद की जा सकती है।
अलीगढ़ पुलिस का अमानवीय चेहरा आया सामने, CO सिविल लाइन अभय पांडे के पैरों में बुजुर्ग महिला
पैर छूकर फरियाद कर रही महिला को CO ने फटकारा, गाय चोरी में पीड़ित के पति, बेटे को भेजा था जेल
सड़क पर घूम रही गाय राजकुमार लेकर पहुंचा था घर, गाय मालिक ने थाना सिविल लाइन में दी थी तहरीर… pic.twitter.com/UfYozuQhDG
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) April 5, 2025
पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना ने न केवल यूपी पुलिस पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली को कठघरे में ला खड़ा किया है। सवाल यह है कि क्या किसी आम नागरिक को न्याय मांगने का भी अधिकार नहीं रहा? और अगर एक महिला इतनी विनम्रता और लाचारी से बात कर रही है, तो क्या प्रशासन का यह फर्ज नहीं कि वह संवेदनशीलता से पेश आए?
सीओ अभय पांडे का यह व्यवहार प्रशासनिक मर्यादा और नैतिकता के बिल्कुल खिलाफ है। घटना को लेकर अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर सामाजिक संगठनों तक ने विरोध जताना शुरू कर दिया है।
महिला सम्मान और मानवता पर कलंक
यह मामला न सिर्फ एक संवेदनहीन पुलिस अधिकारी की हरकत है, बल्कि यह पूरे महिला सम्मान और मानवता को ठेस पहुंचाने वाला है। जिस देश में “नारी तू नारायणी” की बात कही जाती है, वहां एक बुजुर्ग महिला को न्याय मांगने पर अपमानित किया जाता है, यह शर्मनाक है।
इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में पुलिस की असंवेदनशीलता से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार यह घटना कैमरे में कैद हो गई और पूरी दुनिया ने इसे देखा।
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
जनता अब सीओ अभय पांडे पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है। सोशल मीडिया पर “#SuspendCOAbhayPandey” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि इस अधिकारी को तुरंत निलंबित किया जाए और बुजुर्ग महिला से माफी मांगी जाए।
राजनीतिक दलों ने भी इस मामले में सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर जनता को इंसाफ मांगने का भी हक नहीं, तो लोकतंत्र का क्या औचित्य रह गया है?
निष्कर्ष :
अलीगढ़ की यह घटना सिर्फ एक महिला का अपमान नहीं है, यह पूरे व्यवस्था की पोल खोलने वाला मामला है। जब अधिकारी संवेदनहीन हो जाएं, तो न्याय सिर्फ किताबों में रह जाता है। ऐसे में यह जरूरी है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारी पर उचित कार्रवाई की जाए। तभी जनता का भरोसा फिर से कानून और व्यवस्था पर लौट पाएगा।













