यमन और ईरान के मुहाने पर पहुंचा अमेरिका का दूसरा परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर, हूतियों पर भीषण बमबारी, शिया देश पर भी होगा हमला?

अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज करने का संकेत दिया है। इसके लिए अमेरिकी नौसेना का दूसरा परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत, यूएसएस कार्ल विन्सन, लाल सागर की ओर बढ़ रहा है। यह पोत 24 मार्च 2025 को गुआम के नौसैनिक अड्डे पर रुका था और अब हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियान में शामिल होने के लिए रवाना हो चुका है। इस क्षेत्र में पहले से ही यूएसएस हैरी एस. ट्रूमन तैनात है, जो हूतियों पर लगातार हवाई हमले कर रहा है। इस कदम से न केवल यमन में तनाव बढ़ा है, बल्कि ईरान के साथ अमेरिका की तनातनी भी गहरा गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लड़ाई अब ईरान की ओर मुड़ सकती है, जिससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।

हाइलाइट्स:

  • अमेरिका ने हूती विद्रोहियों पर हमले तेज कर दिए हैं।
  • यूएसएस कार्ल विन्सन गुआम से लाल सागर की ओर बढ़ रहा है।
  • ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है।

लाल सागर में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने हाल के महीनों में लाल सागर में इजरायली और अमेरिकी जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ा दिए हैं। इन हमलों से वैश्विक समुद्री व्यापार को नुकसान पहुंचा है, जिसके जवाब में अमेरिका ने अपनी नौसैनिक ताकत को मजबूत करने का फैसला किया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूतियों और उनके समर्थक ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। यूएसएस हैरी एस. ट्रूमन पहले से ही हूतियों के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है, और अब यूएसएस कार्ल विन्सन के आने से यह अभियान और आक्रामक होने की संभावना है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दोनों विमानवाहक पोतों की तैनाती का आदेश दिया है, ताकि हूतियों को निर्णायक जवाब दिया जा सके।

यूएसएस कार्ल विन्सन की ताकत

यूएसएस कार्ल विन्सन एक निमित्ज-श्रेणी का परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत है, जिसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली नौसैनिक जहाजों में गिना जाता है। यह अमेरिकी नौसेना के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप वन का हिस्सा है। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • विमान क्षमता: 60-70 लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर, जिसमें F-35C जैसे अत्याधुनिक विमान शामिल हैं।
  • वजन: 100,000 टन डिस्पलेसमेंट।
  • लंबाई: 1,092 फीट (333 मीटर)।
  • ताकत: परमाणु ऊर्जा से संचालित, जो इसे लंबे समय तक अभियानों के लिए सक्षम बनाती है।

यह पोत लाल सागर में पहुंचकर हैरी एस. ट्रूमन के साथ मिलकर हूतियों के खिलाफ हवाई और समुद्री हमलों को तेज करेगा। रियर एडमिरल माइकल वोजे ने कहा, “गुआम में रुकना हमारी नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। यह हमें मिशन के लिए तैयार रहने और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।”

हूतियों पर हमले और ईरान का रुख

15 मार्च 2025 को शुरू हुए अमेरिकी हवाई हमलों के बाद हूतियों ने यूएसएस हैरी एस. ट्रूमन पर जवाबी हमले की कोशिश की, लेकिन उनकी मिसाइलें और ड्रोन निशाने से चूक गए। हूती प्रवक्ता ने दावा किया कि उन्होंने पिछले 24 घंटों में तीन बार अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इसे “असफल प्रयास” करार दिया। दूसरी ओर, ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने हूतियों को समर्थन जारी रखा, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ईरान ने इन धमकियों को खारिज करते हुए कहा है कि वह हूतियों के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन अमेरिकी हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

क्या ईरान पर हमला संभव है?

ईरान, एक प्रमुख शिया देश, लंबे समय से हूतियों का समर्थन करता रहा है। अमेरिका के दो विमानवाहक पोतों की तैनाती को कई विशेषज्ञ ईरान के लिए एक चेतावनी मान रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर सख्त नीति अपनाई है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका हूतियों के साथ-साथ ईरान के सैन्य ठिकानों पर भी हमले की योजना बना सकता है। हालांकि, यह कदम पूरे मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर युद्ध को जन्म दे सकता है। ईरान ने कहा है कि वह किसी भी हमले का “विनाशकारी जवाब” देगा।

क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल

गुआम में सैन्य गतिविधियों और लाल सागर में बढ़ती अमेरिकी उपस्थिति से क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह कदम शांति लाएगा या तनाव को और बढ़ाएगा?

  • हां: कुछ का मानना है कि मजबूत सैन्य उपस्थिति हूतियों और ईरान को नियंत्रित कर सकती है।
  • नहीं: अन्य का कहना है कि इससे युद्ध का खतरा बढ़ेगा।
  • शायद: यह स्थिति पर निर्भर करता है कि ईरान और हूती कितनी दूर तक जवाबी कार्रवाई करते हैं।

निष्कर्ष

अमेरिका का यूएसएस कार्ल विन्सन को लाल सागर में भेजना हूतियों के खिलाफ उसकी आक्रामक रणनीति का हिस्सा है। यह कदम न केवल यमन में लड़ाई को तेज करेगा, बल्कि ईरान के साथ तनाव को भी नई ऊंचाई पर ले जा सकता है। क्या यह अभियान शिया देश ईरान पर हमले की ओर बढ़ेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल, लाल सागर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां वैश्विक ध्यान का केंद्र बनी हुई हैं।

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