Viral Video : बिहार में स्कूल की लापरवाही: 7 साल के छात्र की गर्दन खिड़की में फंसी, ग्रामीणों ने ऐसे बचाई जान – कटिहार में प्राथमिक विद्यालय की बड़ी चूक, वायरल वीडियो ने खोली पोल

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Viral Video News : बिहार के कटिहार जिले से आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। एक 7 साल का मासूम छात्र, स्कूल की क्लास रूम की खिड़की में गर्दन फंसाकर जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा। यह हादसा न सिर्फ स्कूल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि हम बच्चों की सुरक्षा को लेकर कितने गैर-जिम्मेदार हो चुके हैं।

Viral Video : कहां की है यह घटना?

यह घटना कटिहार जिले के ताजगंज फसिया वार्ड संख्या 45 में स्थित एक प्राथमिक विद्यालय की है। घटना मंगलवार की है, जब तीसरी कक्षा का छात्र गौरव कुमार स्कूल में सो गया और शिक्षकों ने उसे कक्षा में ही छोड़कर स्कूल के सभी दरवाज़े बंद कर दिए।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, गौरव दोपहर की पढ़ाई के दौरान थककर कक्षा में ही सो गया था। शाम 4 बजे स्कूल की छुट्टी हुई, सभी छात्र-छात्राएं चले गए और स्टाफ ने बिना कक्षा चेक किए स्कूल के सभी दरवाज़े बंद कर दिए।

जब गौरव की नींद खुली, तो वह घबरा गया। दरवाज़ा बंद देखकर उसने बाहर निकलने के लिए खिड़की से निकलने की कोशिश की। तभी उसकी गर्दन खिड़की की ग्रिल में फंस गई। यह एक ऐसा क्षण था जब एक मासूम की जान सिर्फ किस्मत के भरोसे थी।

वायरल हुआ वीडियो – चौंकाने वाला दृश्य

इस पूरी घटना का वीडियो भी इंटरनेट पर वायरल हो गया है, जिसमें देखा जा सकता है कि एक बच्चा खिड़की में फंसा हुआ दर्द और डर से चीख रहा है। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील इंसान के दिल को झकझोर सकता है।

कैसे मिली मदद?

गौरव की किस्मत अच्छी थी कि उसी समय स्कूल के पास कुछ बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। उन्होंने गौरव की चीखें सुनीं और गेंद लेने स्कूल के चारदीवारी में घुसे। वहां गौरव की हालत देखकर वो दौड़ते हुए गांववालों के पास पहुंचे।

कुछ ही मिनटों में आसपास के ग्रामीणों की भीड़ स्कूल के बाहर इकट्ठा हो गई। उन्होंने मुख्य गेट का ताला तोड़ा और अंदर घुसकर बच्चे को खिड़की से बाहर निकाला।

क्या थी स्कूल प्रशासन की गलती?

इस घटना ने स्कूल प्रशासन की ज़िम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

क्या किसी भी क्लास रूम को चेक करना स्टाफ का काम नहीं था?
क्या छात्रों की उपस्थिति जांचना सिर्फ औपचारिकता है?
स्कूल का गेट बंद करने से पहले क्या कोई जिम्मेदार नहीं था यह देखने के लिए कि कोई बच्चा अंदर तो नहीं रह गया?

यह लापरवाही अगर थोड़ी और लंबी खिंचती, तो मासूम गौरव की जान जा सकती थी।

स्थानीय लोगों की मांग – हो कार्रवाई

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामले में कोई माफ़ी या समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
गौरव आज सुरक्षित है, लेकिन यह घटना अगली बार किसी और मासूम की जिंदगी छीन सकती है।

बच्चों की सुरक्षा – केवल किताबों में नहीं, व्यवहार में भी हो

आज के डिजिटल युग में जब हर बात रिकॉर्ड हो रही है, स्कूलों को भी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाना होगा। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं होते, वो बच्चों के रक्षक भी होते हैं। ऐसी घटनाएं उनकी छवि को धूमिल करती हैं।

प्रशासन की चुप्पी – अब तक कोई बयान नहीं

इस भयावह लापरवाही पर अब तक प्रशासन या शिक्षा विभाग की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जब एक छात्र खिड़की में फंसने जैसा दर्दनाक अनुभव झेल चुका है, तब सवाल यह उठता है कि क्या भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं होगा?

सोशल मीडिया पर उठी आवाज

जैसे ही वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्सएप पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
लोगों ने लिखा:

“अगर गांव वाले समय पर न पहुंचते तो आज एक मासूम की जान जा सकती थी। क्या यही है हमारे स्कूलों का स्तर?”

“टीचर सिर्फ पे-स्लिप से मतलब रखते हैं, बच्चों की सुरक्षा से नहीं?”

माता-पिता की जिम्मेदारी भी जरूरी

इस घटना से अभिभावकों को भी यह सीख लेनी चाहिए कि वे स्कूल की गतिविधियों पर नजर रखें। बच्चों से हर दिन स्कूल का अनुभव पूछें। अगर कोई स्कूल बार-बार लापरवाही करता है तो संबंधित विभाग में लिखित शिकायत करें।

निष्कर्ष

कटिहार की यह घटना एक चेतावनी है – स्कूलों को बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी होगी। एक 7 साल का मासूम, सिर्फ स्कूल स्टाफ की लापरवाही की वजह से खिड़की में फंसकर जान गंवा सकता था।

हम सबको यह सवाल खुद से पूछना होगा –
“क्या स्कूल अब बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित जगह रह गए हैं?”

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