Bikaner News : भीनासर स्थित गौरक्ष धोरा धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा वाचक धर्मेश महाराज ने ध्रुव चरित्र, शिव-पार्वती विवाह, नृसिंह अवतार और अजामिल प्रसंगों से भक्तों को भावविभोर किया। सोमवार को श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम।
बीकानेर, भीनासर:
भीनासर स्थित गौरक्ष धोरा धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ने पूरे क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का अद्वितीय वातावरण बना दिया है। तीसरे और चौथे दिन की कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां कथा वाचक अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री धर्मेश जी महाराज ने ध्रुव चरित्र, कपिल अवतार, शिव-पार्वती विवाह, अजामिल प्रसंग, नृसिंह अवतार जैसी महत्त्वपूर्ण कथाओं का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया।
तीसरे दिन: ध्रुव चरित्र और शिव-पार्वती विवाह ने बांधा समां
धर्मेश महाराज ने तीसरे दिन ध्रुव चरित्र और कपिल मुनि अवतार के माध्यम से मानव जीवन के उद्देश्य और ईश्वर भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“मनुष्य जीवन बार-बार नहीं मिलता। यह कलयुग केवल भगवान के नाम स्मरण और भक्ति से ही तरणीय है।”
उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु ने कपिल मुनि के रूप में पांचवां अवतार लिया, जिन्होंने सृष्टि रचना के रहस्य का उद्घाटन किया। कथा के दौरान उन्होंने विशेष रूप से विश्वास की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि—
“जिस कार्य में मन से विश्वास हो, उसमें कभी असफलता नहीं मिलती।”
शिव-पार्वती विवाह का वर्णन करते हुए उन्होंने आधुनिक युग में संस्कारों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि:
“संस्कारों के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं होता। जैसे शरीर में आत्मा के बिना प्राण नहीं, वैसे ही जीवन में संस्कारों के बिना स्थायित्व नहीं।”
Bikaner News: दूर-दराज़ से पहुंचे श्रद्धालु, भक्ति में लीन दिखे
तीसरे दिन की कथा में दूर-दराज़ से बसों द्वारा आए महिला-पुरुष श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। गौरक्ष धोरा धाम में गूंजते भजनों और श्रद्धा से ओत-प्रोत वातावरण ने सभी को भावविभोर कर दिया।
चौथे दिन: सत्संग, वैराग्य और श्रीहरि का नाम ही मोक्ष का मार्ग
चौथे दिन पुरंजनोपाख्यान, जड़ भरत चरित्र, अजामिल कथा, नृसिंह अवतार जैसे प्रसंगों ने कथा को और भी दिव्य और सारगर्भित बना दिया। धर्मेश महाराज ने कहा:
“मनुष्य जीवन में अनजाने में कई पाप होते हैं, जिनसे मुक्ति का एकमात्र उपाय है – भगवान के समक्ष प्रायश्चित और सत्संग।”
उन्होंने सत्संग को जीवन परिवर्तन का माध्यम बताते हुए कहा कि:
“काम, क्रोध, लोभ, मोह से मुक्ति का सर्वोत्तम साधन है सत्संग और भगवान का नाम।”
सारगर्भित प्रवचनों के साथ-साथ भजन मंडली के भजनों पर श्रोता झूम उठे। कथा स्थल पर उपस्थित लोगों ने नाचकर अपनी भक्ति प्रकट की।
वैराग्य का संदेश: संसार में रहते हुए भी संसार से दूर रहो
व्यासपीठाधीश्वर धर्मेश महाराज ने वैराग्य को मानव जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि—
“वैराग्य व्यक्ति को ज्ञानी बनाता है, और संसार में रहते हुए भी वह संसारिक मोह-माया से दूर रहता है।”
संतों का हुआ समागम, भव्य संकीर्तन और प्रसादी का आयोजन
कथा आयोजक प्रवीण भाटी ने बताया कि शनिवार को संतों का भव्य समागम भी हुआ। विभिन्न स्थानों से पधारे संतों ने संकीर्तन में भाग लिया। आयोजन स्थल पर भोजन-प्रसादी और भजन संध्या के साथ दिव्यता का अनूठा अनुभव हुआ।
सोमवार को मनाया जाएगा श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
कथा आयोजकों ने बताया कि सोमवार को श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के भव्य आयोजन की तैयारी की जा चुकी है। पूरे धाम परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। भक्तजन भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण कर आनंद प्राप्त करेंगे।
इस पावन आयोजन के माध्यम से न केवल धार्मिक आस्था जागृत हो रही है, बल्कि समाज को संस्कार, सेवा और आत्मिक शुद्धता का संदेश भी मिल रहा है। आयोजन समिति का कहना है कि भविष्य में ऐसे आयोजन के दौरान बीमा, पेंशन योजना (Yojana), वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस, एवं अन्य सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी प्रसारित की जाएगी, ताकि श्रद्धालु आध्यात्मिक लाभ के साथ-साथ सामाजिक लाभ भी प्राप्त कर सकें। इस प्रकार के कार्यक्रमों को सरकार और प्रशासन द्वारा भी सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे जन-जन तक इसका लाभ पहुंचे।
निष्कर्ष:
श्रीमद्भागवत कथा न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि जीवन दर्शन, संस्कारों और समाज सुधार का संदेश देती है। धर्मेश महाराज के द्वारा प्रस्तुत इस कथा में ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की त्रिवेणी प्रवाहित हुई, जिसने भीनासर सहित पूरे बीकानेर क्षेत्र को भक्ति रस में डुबो दिया।











