Rajasthan : राजस्थान की राजधानी में पुलिस पर से आमजन का भरोसा एक बार फिर डगमगाया, जब जयपुर कमिश्नरेट की एक जिला स्पेशल टीम (DST) ने सट्टा खेल रहे सटोरियों से लाखों की रिश्वत में सौदेबाज़ी कर ली। लेकिन किस्मत ने सटोरियों का साथ दिया या यूं कहें कि “असली पुलिस” की एंट्री ने पूरा खेल बिगाड़ दिया। शिवदासपुरा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंच कर ना सिर्फ सौदेबाज़ी रोक दी, बल्कि पूरे घटनाक्रम को बेनकाब कर दिया।
सट्टा पकड़ने गए, लेकिन मामला बना ‘कमाई का जरिया’
यह शर्मनाक घटना जयपुर कमिश्नरेट के दक्षिण जिले की है। DST की टीम को सूचना मिली थी कि एक फ्लैट में दो सटोरिये आईपीएल मैच पर सट्टा खेल रहे हैं। टीम मौके पर पहुंची भी और सटोरियों को पकड़ भी लिया। लेकिन यहां से कहानी ने घिनौना मोड़ लिया – आरोप है कि टीम ने कानून के रास्ते चलने की बजाय ‘सौदेबाज़ी’ का रास्ता चुन लिया।
टीम ने सटोरियों से कहा – “50 लाख दो, हम मामला रफा-दफा कर देंगे।” पहले तो सटोरिये घबराए, फिर मोलभाव शुरू हुआ। आखिरकार मामला 25 लाख रुपये में सेट हो गया।
‘मोटी मुर्गियों’ को देख बहक गए खाकीधारी
DST टीम में शामिल ASI नैनुलाल, हेड कांस्टेबल हरिओम, कांस्टेबल राजेश चौधरी, बुद्धराम जाट और ओमप्रकाश मीणा पर यह पूरा घटनाक्रम सामने आया है। आरोपियों में से कांस्टेबल राजेश चौधरी ने पहले 50 लाख की डिमांड की, फिर सौदा घटाकर 25 लाख रुपये पर आकर ठहरा।
रकम का भुगतान फ्लैट के बाहर एक तीसरे व्यक्ति के माध्यम से किया गया। सटोरिये संदीप के बयान के अनुसार, यह राशि राजेश चौधरी के एक जानकार को दी गई।
लेकिन प्लान को कर दिया शिवदासपुरा थाने ने फ्लॉप!
ऐन वक्त पर शिवदासपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई, और जो चल रहा था, वह एकदम उजागर हो गया। पुलिस टीम और सटोरियों के बीच तीखी बहस हुई, क्योंकि सटोरिये पैसे देने के बाद भी घबराए हुए थे और डील पब्लिक हो चुकी थी।
मामला जब पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ तक पहुंचा, तो उन्होंने बिना देरी के कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए।
तीन कांस्टेबल सस्पेंड, दो लाइन हाजिर – लेकिन कुछ अब भी फरार
पुलिस कमिश्नर के आदेश पर कांस्टेबल राजेश चौधरी, बुद्धराम जाट और ओमप्रकाश मीणा को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं ASI नैनुलाल और हेड कांस्टेबल हरिओम को लाइन हाजिर किया गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन तीनों सस्पेंड कांस्टेबलों की मौके से फरारी हो गई और फिलहाल पुलिस इनकी तलाश में जुटी हुई है।
राजनीतिक और सामाजिक साख पर बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ सट्टा या पुलिस की लापरवाही का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत ‘कानून’ की साख पर हमला है। जयपुर जैसे मेट्रो शहर में जब पुलिसकर्मी ही सट्टे के बदले मोटी रकम लेकर सौदेबाज़ी करें, तो आम जनता किससे उम्मीद करे?
सवाल जो उठते हैं…
- DST जैसी स्पेशल यूनिट को क्या सिर्फ कमाई का साधन मान लिया गया है?
- इन पुलिसकर्मियों पर कब तक कार्रवाई की जाएगी और क्या केवल सस्पेंशन से जवाबदेही पूरी हो जाएगी?
- सट्टेबाजी जैसे गंभीर अपराध को यूं ‘बेच’ देना – क्या इस पर भी अलग से चार्ज लगेगा?
अब जांच पर टिकी है उम्मीद
पूरे मामले की जांच उच्चाधिकारियों के निर्देशन में की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, सटोरियों से की गई बातचीत, लोकेशन और लेनदेन की डिटेल्स की रिकॉर्डिंग भी सामने आ सकती है, जिससे दोषियों पर और सख्त कार्रवाई संभव है।











