Rajasthan : उदयपुर – क्या आपने कभी किसी भगवान को 1111 फीट लंबी पगड़ी पहनते देखा है? नहीं न? तो चलिए आपको लेकर चलते हैं राजस्थान के उदयपुर जिले की उस बदनौर हवेली में, जहां इस बार की हनुमान जयंती कुछ अलग ही अंदाज़ में मनाई गई। यहाँ के मंशापूर्ण हनुमान मंदिर में बजरंगबली को 1111 फीट लंबी लहरिया पगड़ी पहनाई गई और इस अद्भुत दृश्य ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
Rajasthan : पगड़ी नहीं, आस्था की जीती-जागती मिसाल
हनुमान जी को पहनाई गई यह पगड़ी केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि मेवाड़ की संस्कृति, भक्ति और परंपरा की जीती-जागती मिसाल है। मंदिर के प्रवक्ता प्रवीण बैरागी ने जानकारी दी कि यह परंपरा साल 2010 से चली आ रही है और हर साल पगड़ी का डिज़ाइन, लंबाई और शैली में बदलाव होता है। लेकिन इस बार की पगड़ी ने तो इतिहास रच दिया!
कहां से आया कपड़ा, कैसे बनी इतनी लंबी पगड़ी?
इस विशेष पगड़ी के लिए भीलवाड़ा की कॉटन मिल से पारंपरिक लहरिया डिजाइन वाला कपड़ा मंगवाया गया था। पगड़ी बनाने में पूरे एक सप्ताह का समय लगा और इसमें दौलत सेन और उनका परिवार दिन-रात जुटा रहा। दौलत सेन ने बताया, “यह सिर्फ पगड़ी नहीं, हमारी श्रद्धा, मेहनत और संस्कृति की एक साथ बुनी गई तस्वीर है।”
पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल, हर मोड़ पर भक्ति का साथ
पगड़ी की लंबाई और डिज़ाइन में पारंपरिक मेवाड़ी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। कपड़े में सिलवटें न पड़ें, इसका विशेष ध्यान रखा गया। बार-बार तकनीकी समस्याएं आने के बावजूद भगवान की सेवा भावना ने हर चुनौती को आसान बना दिया।
शोभायात्रा ने किया माहौल को भक्तिमय
हनुमान जयंती के दिन इस विशेष पगड़ी को पहनाकर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह यात्रा बदनोर की हवेली से शुरू होकर मीठा राम जी के मंदिर तक गई। ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और पारंपरिक वेशभूषा में सजे हनुमान भक्तों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा उदयपुर भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया।
शोभायात्रा में हजारों लोग शामिल हुए और इस अद्भुत आयोजन को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचे। कई लोगों ने इस पल को कैमरे में कैद किया और सोशल मीडिया पर शेयर किया, जहां यह आयोजन तेजी से वायरल हो गया।
पगड़ी की लंबाई बनी सोशल मीडिया पर ट्रेंड
सोशल मीडिया पर #1111FeetPagdi और #HanumanJayantiUdaipur ट्रेंड करने लगा। लोग इस अनूठी पहल की तारीफ करते नहीं थक रहे। कई यूज़र्स ने कहा कि “आज पहली बार किसी भगवान को इतनी भव्य पगड़ी में देखा, ये वाकई अद्भुत था।”
मेवाड़ी परंपरा को जीवंत रखने की प्रेरणा
यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं था, बल्कि एक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने की प्रेरणा भी था। उदयपुरवासियों ने यह दिखा दिया कि परंपरा, आस्था और तकनीक मिलकर कैसे एक अनोखा इतिहास रच सकते हैं।
निष्कर्ष: पगड़ी में बंधी श्रद्धा, परंपरा और पहचान
हनुमान जयंती 2025 का यह आयोजन मेवाड़ के लिए सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति और आस्था का पर्व बन गया। 1111 फीट की पगड़ी सिर्फ कपड़े की लंबाई नहीं थी, वह एक संदेश थी – जब श्रद्धा, परंपरा और एकता एक साथ चलें, तो हर चुनौती आसान हो जाती है।











