Rajasthan सरकार ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत कुक कम हेल्पर्स (Cook Cum Helpers) के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। 1 अप्रैल 2025 से इन कर्मचारियों के मानदेय में 15% की बढ़ोतरी की जाएगी। यह ऐलान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने राजस्थान विधानसभा में किया।
विधानसभा में उठा मुद्दा
सोमवार को राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत कुक कम हेल्पर्स के कम मानदेय का मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि राज्यभर के 65,000 सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने वाले कर्मचारियों को मात्र 3,000 रुपये प्रति माह वेतन दिया जा रहा है। इतनी कम सैलरी में कोई भी व्यक्ति इस काम को करने के लिए तैयार नहीं है, जिससे स्कूलों में हेल्पर्स की भारी कमी देखी जा रही है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि इन कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 की धारा 27 के तहत शामिल किया जाए, जिससे उन्हें बेहतर वेतन और सुविधाएं मिल सकें।
मंत्री मदन दिलावर का जवाब
इस मुद्दे पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए पोषाहार तैयार करने वाले कुक कम हेल्पर्स का मानदेय भारत सरकार और राजस्थान सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में इन कर्मचारियों को मात्र 1,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलता था, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 2,143 रुपये कर दिया गया है। अब 1 अप्रैल 2025 से इसमें 15% की बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे यह राशि 2,464 रुपये हो जाएगी।
इसके अतिरिक्त, दूध गर्म करने के लिए भी इन्हें 500 रुपये अतिरिक्त दिए जाते हैं। इस तरह, कुल मिलाकर इन कर्मचारियों को करीब 2,964 रुपये प्रति माह का मानदेय मिलेगा।
न्यूनतम मजदूरी में शामिल करने की मांग खारिज
विधायक रविंद्र सिंह भाटी की इस मांग पर कि कुक कम हेल्पर्स को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत लाया जाए, शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस पद को न्यूनतम मजदूरी की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए इन्हें न्यूनतम मजदूरी नहीं दी जा सकती। हालांकि, सरकार इनके वेतन में समय-समय पर वृद्धि कर रही है और आगे भी इस दिशा में काम किया जाएगा।
Rajasthan में मानदेय बढ़ाने का निर्णय क्यों जरूरी?
Rajasthan के सरकारी स्कूलों में कार्यरत हजारों कुक कम हेल्पर्स बेहद कम वेतन पर काम कर रहे हैं। वर्तमान में उन्हें मात्र 3,000 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, जो महंगाई के इस दौर में बहुत ही अपर्याप्त है।
कई राज्यों में मिड-डे मील योजना के तहत कार्यरत हेल्पर्स को इससे अधिक वेतन दिया जाता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली और महाराष्ट्र में यह राशि राजस्थान से अधिक है।
क्या होगा मानदेय बढ़ने से फायदा?
- कुक कम हेल्पर्स को थोड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।
- सरकारी स्कूलों में हेल्पर्स की कमी को दूर किया जा सकेगा।
- बच्चों को बेहतर पोषण और स्वच्छ भोजन मिल सकेगा।
- महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकेगा।
क्या सरकार आगे और बढ़ा सकती है वेतन?
हालांकि, 15% की वृद्धि राहत देने वाली खबर है, लेकिन यह अभी भी न्यूनतम मजदूरी के बराबर नहीं है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस मुद्दे पर आगे विचार करने की बात कही है। संभव है कि भविष्य में और बढ़ोतरी की जाए, जिससे कर्मचारियों को अधिक राहत मिल सके।
निष्कर्ष
Rajasthan सरकार का यह फैसला कुक कम हेल्पर्स के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, अभी भी इन्हें न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाने की जरूरत है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से 15% मानदेय वृद्धि की घोषणा कर दी है, लेकिन क्या यह पर्याप्त होगा? यह देखने वाली बात होगी कि आगे सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।











