Citizenship law India – उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पाकिस्तान से आई 22 महिलाएं पिछले दो दशकों से भारतीय पुरुषों की पत्नियां बनकर भारत में रह रही हैं। इन सभी महिलाओं के कुल 95 बच्चे हो चुके हैं, जिनमें से कुछ की शादी भी हो चुकी है और कई दादी-नानी बन चुकी हैं। लेकिन अब जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है और पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजा जा रहा है, तब इन महिलाओं और उनके बच्चों की नागरिकता पर सवाल उठ खड़ा हुआ है।
भारत में रह रही पाकिस्तानी महिलाएं: कैसे हुआ आगमन?
इन 22 महिलाओं ने भारतीय पुरुषों से शादी की और भारत में रहने के लिए Long-Term Visa (LTV) पर यहां आ गईं। इनमें अधिकतर की शादियां दो दशक पहले हुई थीं और वे लगातार भारत में रह रही हैं। हालांकि, अभी तक इनमें से किसी को भी भारतीय नागरिकता नहीं मिली है। इनके बच्चे भारत में पैदा हुए हैं और अधिकतर की शिक्षा भी यहीं हुई है।
बच्चों की नागरिकता को लेकर सवाल: भारत का क्या है कानून?
भारत में नागरिकता का निर्धारण Indian Citizenship Act, 1955 के तहत किया जाता है। इसके अनुसार:
- अगर बच्चा 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्मा है, तो वह स्वत: नागरिक है।
- 1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे बच्चे को नागरिकता तभी मिलेगी जब माता-पिता में से कोई एक भारतीय हो।
- 3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे बच्चों के लिए दोनों शर्तें लागू होती हैं – एक माता-पिता भारतीय होना चाहिए और दूसरा अवैध प्रवासी नहीं होना चाहिए।
इन मामलों में बच्चों के पिता भारतीय नागरिक हैं और मां वैध वीजा पर भारत में रह रही हैं। अत: तकनीकी रूप से ये बच्चे भारतीय नागरिकता के पात्र हैं।
Citizenship law India : पाकिस्तान का क्या है रुख?
पाकिस्तानी नागरिकता कानून के तहत अगर मां या पिता पाकिस्तानी नागरिक हैं, तो बच्चा भी पाकिस्तानी नागरिक माना जाएगा – चाहे उसका जन्म कहीं भी हुआ हो। ऐसे में इन बच्चों को पाकिस्तान की नागरिकता स्वत: प्राप्त हो जाती है। लेकिन भारत और पाकिस्तान दोनों दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देते। इसलिए यदि इन बच्चों को भारत की नागरिकता चाहिए, तो उन्हें पाकिस्तान की नागरिकता छोड़नी होगी।
भारत-पाक तनाव से बढ़ी परेशानी
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत में पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ सख्ती शुरू हो गई है। शॉर्ट टर्म वीजा पर आए लोगों को वापस भेजा जा रहा है और Long-Term Visa धारकों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। मुरादाबाद पुलिस ने इन महिलाओं की पहचान की है और सभी थानों को अलर्ट किया गया है।
पुलिस और प्रशासन की तैयारी
SP मुरादाबाद ने बयान दिया कि सभी थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन महिलाओं की स्थिति की जानकारी लें और नागरिकता प्रक्रिया में आ रही अड़चनों की रिपोर्ट बनाकर भेजें। इस मामले में गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से भी संपर्क किया जा रहा है।
क्या मिलेगी नागरिकता?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महिलाओं ने भारत में वैध रूप से प्रवेश किया है, शादी को दस्तावेज़ों से प्रमाणित किया गया है और वे लगातार LTV पर रह रही हैं, तो उन्हें नागरिकता मिलने में बाधा नहीं होनी चाहिए। लेकिन इसके लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया और केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक है।
निष्कर्ष :
यह मामला सिर्फ नागरिकता का नहीं, बल्कि मानवीयता और संवैधानिक अधिकारों का भी है। वर्षों से भारत में रह रही ये महिलाएं अब भारत का ही हिस्सा बन चुकी हैं। इनके बच्चे यहीं पले-बढ़े हैं, स्कूल-कॉलेज गए हैं और भारतीय समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। सरकार को चाहिए कि वह मानवीय आधार पर इस मामले पर गंभीरता से विचार करे और इन परिवारों को स्पष्ट दिशा दे।
क्या आपको लगता है कि इन बच्चों को भारतीय नागरिकता मिलनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।













