नागौर में मिला खजाना! लिथियम-टंगस्टन की सबसे बड़ी खोज से बदलेगी राजस्थान की तकदीर Nagaur Mineral Discovery

Nagaur Mineral Discovery

Nagaur Mineral Discovery: राजस्थान के नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र के रेवंत हिल में टंगस्टन और लिथियम के विशाल भंडार की पुष्टि हुई है। केंद्रीय खान और कोयला मंत्री किशन रेड्डी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि यहां बहुमूल्य खनिज संसाधन बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं। इन खनिजों से भारत की 80% मांग पूरी हो सकती है, जिससे देश को लिथियम आयात पर चीन की निर्भरता कम करनी पड़ेगी।

क्या है इस खोज का महत्व?

  • औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी खोज।
  • लिथियम की उपलब्धता से इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
  • टंगस्टन रक्षा, अंतरिक्ष और औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।
  • देश की आर्थिक और सामरिक मजबूती बढ़ेगी।

खनिज भंडार के आंकड़े

  • टंगस्टन: 13.39 मिलियन टन (800 PPM कट-ऑफ)।
  • लिथियम: 6.33 मिलियन टन (400 PPM कट-ऑफ)।
  • नियोबियम-टैंटलम: 16.42 मिलियन टन (100 PPM कट-ऑफ)।
  • टिन: 0.15 मिलियन टन (400 PPM कट-ऑफ)।
  • अन्य खनिज: ग्रेफाइट, सीसा और जस्ता के लिए भी अन्वेषण जारी।

कैसे हुई यह खोज? Nagaur Mineral Discovery

वर्ष 2017-18 में जीएसआई (Geological Survey of India) द्वारा जी-3 चरण की खोज में उत्साहजनक निष्कर्ष मिले। इसके आधार पर वर्ष 2019-20, 2020-21 और 2022-23 में डेगाना क्षेत्र में तीन जी-2 चरण के नए अन्वेषण कार्यक्रम किए गए, जिनमें टंगस्टन और लिथियम के बड़े भंडार पाए गए।

नागौर और राजस्थान के लिए क्या फायदे?

  • स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि।
  • खनिज संपदा के कारण औद्योगिक निवेश बढ़ेगा।
  • लिथियम आधारित उद्योगों के लिए नागौर नया केंद्र बन सकता है।
  • राजस्थान सरकार को राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी।

पर्यावरण और भविष्य की योजनाएँ

केंद्र सरकार इस क्षेत्र में सतत और पर्यावरण अनुकूल खनन तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रही है। इससे पर्यावरण संतुलन बना रहेगा और साथ ही स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

निष्कर्ष

Nagaur Mineral Discovery: नागौर जिले में मिली यह खनिज संपदा भारत की ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। लिथियम और टंगस्टन जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज से देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

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