बिहार कैडर की तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा, जिन्हें ‘लेडी सिंघम’ के नाम से जाना जाता है, इन दिनों सुर्खियों में हैं। वजह है उनका आईपीएस पद से इस्तीफा, जिसने सबको चौंका दिया। महज 28 साल की उम्र में काम्या ने वह नौकरी छोड़ दी, जो लाखों युवाओं का सपना होती है। ओडिशा की रहने वाली इस युवा अधिकारी ने 22 साल की उम्र में यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का कीर्तिमान हासिल किया था। लेकिन अगस्त 2024 में पारिवारिक कारणों का हवाला देकर इस्तीफा देने के बाद, 27 मार्च 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे स्वीकार कर लिया। आखिर क्या वजह रही कि काम्या ने यह बड़ा फैसला लिया? आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी।
कौन हैं काम्या मिश्रा?
काम्या मिश्रा ओडिशा के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर की रहने वाली हैं। वे अपने पिता राजकुमार मिश्रा की इकलौती संतान हैं, जिनका माइनिंग और इस्पात का बड़ा कारोबार है। पढ़ाई में शुरू से ही होनहार काम्या ने 12वीं में 98% अंक हासिल किए और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद, पहले ही प्रयास में 22 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास की और 172वीं रैंक हासिल कर 2019 बैच की आईपीएस बनीं। शुरू में उन्हें हिमाचल प्रदेश कैडर मिला, लेकिन बाद में वे बिहार कैडर में ट्रांसफर हो गईं।
शादी और राजस्थान से नाता
काम्या की जिंदगी में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया, जब उनकी मुलाकात हैदराबाद में ट्रेनिंग के दौरान अपने बैचमेट अवधेश सरोज दीक्षित से हुई। अवधेश राजस्थान के करौली जिले के हिण्डौन सिटी के रहने वाले हैं। उनके पिता बसंत दीक्षित सार्वजनिक निर्माण विभाग से वरिष्ठ सहायक के पद से रिटायर हुए हैं, जबकि मां सरोज देवी गृहिणी हैं। अवधेश ने हिण्डौन में 12वीं तक पढ़ाई की, फिर जेईई के जरिए आईआईटी मुंबई से एयरोस्पेस में बीटेक किया। कुछ समय तक जोधपुर और नासिक में कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने के बाद, उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की और 2019 में दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। उन्हें बिहार कैडर मिला।
2021 में उदयपुर में 5 दिनों तक चले भव्य समारोह में काम्या और अवधेश की शादी हुई। शादी के बाद काम्या ने हिमाचल प्रदेश कैडर छोड़कर बिहार कैडर जॉइन किया, ताकि दोनों एक ही राज्य में सेवा दे सकें। इस तरह काम्या राजस्थान की बहू बन गईं।
इस्तीफे की वजह क्या रही?
काम्या ने अगस्त 2024 में बिहार के दरभंगा ग्रामीण एसपी के पद से इस्तीफा दे दिया था। आधिकारिक तौर पर उन्होंने इसे निजी और पारिवारिक कारण बताया। शुरुआत में उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ और उन्हें 180 दिनों की छुट्टी दी गई, लेकिन अंततः मार्च 2025 में राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दे दी। उनके ससुर बसंत दीक्षित के मुताबिक, काम्या ने शुरू से ही कहा था कि वे सिर्फ 5 साल तक नौकरी करेंगी। उनके पिता का बड़ा कारोबारी साम्राज्य और इकलौती संतान होने की जिम्मेदारी ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए प्रेरित किया।
काम्या अब अपने पिता के माइनिंग और इस्पात कारोबार में हाथ बंटाना चाहती हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि पुलिस सेवा की व्यस्तता के कारण वे परिवार को समय नहीं दे पा रही थीं, जिसके चलते उन्होंने यह कठिन निर्णय लिया। वहीं, उनके पति अवधेश अभी भी बिहार के गोपालगंज में बतौर आईपीएस अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
काम्या का करियर और उपलब्धियां
काम्या को बिहार में ‘लेडी सिंघम’ के नाम से जाना जाता था। दरभंगा ग्रामीण एसपी के तौर पर उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल केस सुलझाए, जिनमें विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के नेता मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी की हत्या का मामला सबसे चर्चित रहा। उनकी तेज-तर्रार छवि और अपराधियों के खिलाफ सख्त रवैये ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। लेकिन 5 साल की छोटी सी सेवा के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया।
निष्कर्ष
काम्या मिश्रा की कहानी मेहनत, सफलता और पारिवारिक जिम्मेदारी का अनूठा संगम है। 22 साल की उम्र में आईपीएस बनने से लेकर 28 साल में नौकरी छोड़ने तक, उनका सफर प्रेरणादायक है। राजस्थान की बहू और ओडिशा की बेटी अब अपने परिवार के कारोबार को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। यह फैसला भले ही चौंकाने वाला हो, लेकिन यह उनकी प्राथमिकताओं और पारिवारिक मूल्यों को दर्शाता है।











