स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत के साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भी महंगा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि अब लोग Health Loan लेकर बीमा प्रीमियम चुका रहे हैं। कई स्टार्टअप कंपनियां हर महीने हजारों लोगों को Health Insurance Loan दे रही हैं, जिससे वे अपनी पॉलिसी जारी रख सकें या कवरेज बढ़ा सकें।
हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम क्यों बढ़ रहा है?
- बीमा इंडस्ट्री के अनुसार, 52% पॉलिसीधारकों की प्रीमियम लागत 25% तक बढ़ गई है।
- हेल्थकेयर खर्च में 14% की महंगाई आई है, जिससे इंश्योरेंस कंपनियों ने दरें बढ़ा दी हैं।
- 60 साल से अधिक उम्र वालों के लिए सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है, जिससे वे Health Loan लेने को मजबूर हो रहे हैं।
हजारों लोग Health Loan लेकर बीमा प्रीमियम भर रहे हैं
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, Finsall, Bimpay Finsure और InsurFin जैसी कंपनियां Health Insurance Premium Loan दे रही हैं।
- हर महीने 7,000 से अधिक ग्राहक इन कंपनियों से जुड़ रहे हैं।
- औसतन हर ग्राहक ₹40,000 तक का Medical Loan ले रहा है।
- ब्याज दर 12% से 16% तक होती है, जो व्यक्ति की क्रेडिट प्रोफाइल पर निर्भर करती है।
छोटे शहरों में सबसे ज्यादा Health Loan की मांग
BimaPay के CEO हनुत मेहता के अनुसार,
- 70% ग्राहक टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं।
- इनमें से 30% लोग पहले कभी लोन नहीं लिए होते।
- लोग EMI ऑप्शन का उपयोग कर बड़ा हेल्थ इंश्योरेंस कवर ले रहे हैं।
40 से 50 साल के लोग सबसे ज्यादा Health Loan ले रहे हैं
- हाल ही में शुरू हुई InsurFin कंपनी का कहना है कि उनके यहां औसत Medical Loan ₹55,000 का है।
- CEO चित्तरंजन सवाड़ी के मुताबिक,
- 40 से 50 साल के ग्राहक सबसे ज्यादा Health Insurance Loan ले रहे हैं।
- बढ़ती मेडिकल लागत को देखते हुए वे बड़ा बीमा कवर लेना चाहते हैं।
- बीमा एजेंट भी अपने ग्राहकों को Health Loan दिलाने में मदद कर रहे हैं।
IRDAI के नए दिशा-निर्देश क्या हैं?
बीमा नियामक प्राधिकरण IRDAI ने 2024 में नए नियम लागू किए हैं, जिनके तहत –
- 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में सालाना 10% से ज्यादा वृद्धि नहीं हो सकती।
- बीमा कंपनियों को पहले से मंजूरी लेनी होगी।
- GST काउंसिल सीनियर सिटीजन्स के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स छूट देने पर विचार कर रही है।
क्या हेल्थ इंश्योरेंस के लिए Health Loan लेना सही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि –
1.हेल्थ इंश्योरेंस बिना किसी रुकावट के जारी रखना जरूरी है।
2.अगर एकमुश्त भुगतान संभव नहीं हो, तो EMI में प्रीमियम भरना फायदेमंद हो सकता है।
3.ब्याज दर और शर्तों को ध्यान में रखकर ही Health Insurance Loan लेना चाहिए।
निष्कर्ष
हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम की बढ़ती कीमतों के कारण अब लोग Health Loan लेकर इसे भर रहे हैं। यह सुविधा उन लोगों के लिए मददगार हो सकती है जो एकमुश्त भुगतान नहीं कर सकते, लेकिन क्या Health Loan लेना एक दीर्घकालिक समाधान है या सरकार को इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाने चाहिए?














