Rajasthan: बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव के ठिकानों पर ED की छापेमारी
जयपुर, दौसा और अलवर में कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजस्थान के पूर्व निर्दलीय विधायक बलजीत यादव के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर, दौसा और अलवर जिलों में उनके 10 ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी का कारण उनकी फर्म पर सरकारी आपूर्ति में भ्रष्टाचार और खराब सामग्री वितरण के गंभीर आरोप बताए जा रहे हैं।
घटिया सामान की आपूर्ति के आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, बलजीत यादव की फर्म पर सरकारी स्कूलों में विधायक कोष से वितरित किए गए खेल-किट में भ्रष्टाचार का आरोप है। बताया गया है कि इन किट्स को बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया और इन्हें फर्जी कंपनियों के माध्यम से सप्लाई किया गया। इस मामले में पहले ही एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) द्वारा केस दर्ज किया जा चुका है। अब ED ने इस मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए ठिकानों पर छापेमारी की है।
3.72 करोड़ रुपये का घोटाला
बलजीत यादव पर सरकारी कोष से 3.72 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। विधायक रहते हुए उन्होंने स्कूली बच्चों के लिए खेल-किट्स का वितरण किया था, लेकिन आरोप है कि इन किट्स की खरीद टेंडर प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई। खरीद प्रक्रिया के लिए गठित कमिटी ने केवल उन्हीं फर्मों को अनुशंसा दी, जो पहले से ही इस घोटाले में शामिल थीं।
बहरोड़ में स्थिति शांत
हालांकि, इस बार की छापेमारी में बहरोड़ के ठिकानों पर कोई हलचल देखने को नहीं मिली। यह स्पष्ट नहीं है कि ED ने बहरोड़ को जांच से बाहर रखा है या जांच का केंद्र अन्य जिलों में स्थानांतरित कर दिया गया है।
भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का नेता खुद निशाने पर
बलजीत यादव की छवि एक समय भ्रष्टाचार विरोधी नेता की थी। उन्होंने खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया और भ्रष्टाचार के खिलाफ सबूत लाने वालों को 51,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। लेकिन अब वे खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे हुए हैं। दिसंबर 2024 में, एसीबी ने उनके और अन्य 8 अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
कांग्रेस को दिया था समर्थन
2018 से 2023 के बीच बहरोड़ के निर्दलीय विधायक के रूप में कार्य करते हुए, बलजीत यादव ने अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया था। उन्होंने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में मतदान भी किया था। इस समर्थन ने उन्हें राजनीतिक रूप से मजबूत बनाया, लेकिन उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनकी साख को गहरी चोट पहुंचाई है।
क्या है आगे की राह?
इस मामले में ED की जांच और छापेमारी अभी जारी है। ED द्वारा जब्त किए गए दस्तावेज़ और अन्य सबूत इस बात को उजागर करेंगे कि क्या बलजीत यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
बलजीत यादव का मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम और उसके भीतर छिपी विसंगतियों को उजागर करता है। यह घटना एक महत्वपूर्ण संकेत है कि पारदर्शिता और ईमानदारी के बिना कोई भी राजनेता जनता का विश्वास लंबे समय तक नहीं जीत सकता। ED की यह कार्रवाई राजस्थान के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में गहरी चर्चा का विषय बनी हुई है।











