Ajmer Sharif Dargah News : अजमेर शरीफ दरगाह पर बढ़ी मुश्किलें: अजमेर शरीफ दरगाह के वकील का दांव पड़ा उल्टा, हाई कोर्ट ने लिया बड़ा फैसला! कैग को दिया चौंकाने वाला आदेश! – जानिए पूरी कहानी

Ajmer Sharif Dargah News Update

Ajmer Sharif Dargah News Update: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को अजमेर शरीफ दरगाह के खातों की जांच को लेकर बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने कहा है कि वह दरगाह के खातों का कैग (CAG) से ऑडिट कराने के पक्ष में है। कोर्ट ने कैग के वकील को स्पष्ट निर्देश लेने और अपना रुख पेश करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद दरगाह प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

Ajmer Sharif Dargah Update : दरगाह वकील की आपत्ति पर कोर्ट का सख्त रुख

सुनवाई के दौरान दरगाह के वकील ने अदालत को बताया कि कैग ने उनके सामने ऑडिट की शर्तें साफ तौर पर नहीं रखी हैं और बिना किसी पूर्व जानकारी के तीन सदस्यीय ऑडिट पैनल का गठन कर दिया गया है। इस पर जस्टिस सचिन दत्ता ने सख्ती दिखाते हुए पूछा,
“क्या आपने ऑडिट शुरू किया है या नहीं?”
इसके जवाब में कैग की ओर से कहा गया कि ऑडिट अब तक शुरू नहीं हुआ है। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इस ऑडिट को रिकॉर्ड में लेना चाहता है और कैग को जल्द से जल्द अपने रुख को स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

कोर्ट की टिप्पणी: अधिकार तो है, लेकिन…

जस्टिस दत्ता ने साफ किया कि दरगाह के वकील को प्रतिनिधित्व का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार तभी प्रभावी हो सकता है जब ऑडिट की शर्तें पहले से स्पष्ट हों। अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कैग ने ऑडिट शुरू करने से पहले दरगाह प्रबंधन को कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

दरगाह की याचिका का क्या था मामला?

दरअसल, अजमेर शरीफ दरगाह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कैग अधिकारियों ने बिना किसी पूर्व सूचना के दरगाह कार्यालय में घुसकर ‘गैरकानूनी तलाशी’ ली, जो डीपीसी अधिनियम और सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन कानून के नियमों के खिलाफ है। दरगाह प्रबंधन का कहना है कि ऑडिट प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

अगली सुनवाई की तारीख

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 7 मई की तारीख तय की है। तब तक कैग को अपने निर्देश स्पष्ट करने होंगे और अदालत के समक्ष अपना स्टैंड पेश करना होगा।

निष्कर्ष :

अजमेर शरीफ दरगाह के खातों को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। दिल्ली हाई कोर्ट की सख्ती से साफ है कि अब दरगाह प्रबंधन को कैग ऑडिट का सामना करना ही पड़ेगा। आने वाली सुनवाई में तय होगा कि दरगाह के आरोपों में कितना दम है और कैग की कार्रवाई कितनी वैध है। यह मामला धार्मिक आस्थाओं और वित्तीय पारदर्शिता दोनों से जुड़ा होने के कारण देशभर में चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

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