Rajasthan : BJP नेता ज्ञानदेव आहूजा फिर विवादों में हैं! कभी JNU को ‘कंडोम और शराब का अड्डा’ बताकर सुर्खियों में आए थे, अब दलित नेता की पूजा के बाद मंदिर में गंगाजल छिड़ककर फिर मचा दी हलचल। जानिए पूरा मामला और कौन हैं ये फायरब्रांड नेता।
राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, और इस बार वजह बना है एक बार फिर से चर्चाओं में आए BJP नेता ज्ञानदेव आहूजा का बयान और उनका गंगाजल छिड़कने का विवादित कदम। कभी JNU को “कंडोम और शराब का अड्डा” बताकर सुर्खियों में आने वाले आहूजा, अब एक दलित नेता की पूजा के बाद मंदिर में गंगाजल छिड़कने को लेकर विवादों में घिर गए हैं।
मंदिर में पूजा के बाद गंगाजल से ‘शुद्धिकरण’?
राजस्थान के अलवर जिले में स्थित एक प्राचीन मंदिर में कांग्रेस के दलित नेता टीकाराम जूली ने हाल ही में पूजा अर्चना की थी। लेकिन इस पूजा के कुछ ही घंटों बाद BJP के वरिष्ठ नेता ज्ञानदेव आहूजा ने मंदिर परिसर में जाकर गंगाजल से शुद्धिकरण किया। उनका कहना था कि मंदिर को ‘अशुद्ध’ कर दिया गया है।
आहूजा के इस कदम से पूरे राजस्थान में राजनीतिक भूचाल आ गया। कांग्रेस ने इस कृत्य को दलित विरोधी मानसिकता बताया और पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल हो गया, जहां आहूजा मंदिर परिसर में गंगाजल छिड़कते नजर आ रहे हैं।
BJP ने बनाई दूरी, लेकिन सियासत गरमा गई
घटना के बाद BJP की तरफ से भी बयान सामने आया जिसमें पार्टी ने कहा कि यह नेता का व्यक्तिगत विचार है और पार्टी इससे सहमत नहीं है। लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे को छोड़ने को तैयार नहीं है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि BJP की जातिवादी सोच आज भी जीवित है और यह उसी की अभिव्यक्ति है।
राम सबके हैं, मंदिर भी सबका है, और यह देश भी हम सबका है।
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली जी द्वारा की गई पूजा को अपवित्र बताना न सिर्फ उनके सम्मान का, बल्कि पूरे दलित समाज की आस्था का अपमान है।
यह बाबा साहेब के विचारों पर भी कुठाराघात है।मैं इस अमानवीय… pic.twitter.com/6VSItbvB5s
— Umang Singhar (@UmangSinghar) April 8, 2025
कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा, “जब एक दलित नेता मंदिर में पूजा करता है तो BJP नेता उसे अपवित्र मानते हैं। यही असली चेहरा है इनका।”
कौन हैं ज्ञानदेव आहूजा?
ज्ञानदेव आहूजा राजस्थान की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह अलवर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं। छात्र जीवन में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्य रहे और 12वीं तक की पढ़ाई करने के बाद पत्रकारिता में भी हाथ आजमाया।
वे कभी ‘मत सम्मत’ नामक साप्ताहिक समाचार पत्र के मैनेजिंग एडिटर भी रहे। BJP से उनका जुड़ाव 1998 से शुरू हुआ जब उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में प्रवेश किया। बाद में 2008 और 2013 में भी वह विधायक चुने गए।
JNU पर विवादित बयान से हुई थी आलोचना
ज्ञानदेव आहूजा को पहली बार नेशनल मीडिया की सुर्खियां तब मिलीं जब उन्होंने 2016 में JNU (जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी) को लेकर एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि JNU में हर दिन:
- 3000 कंडोम
- 3000 बीयर कैन
- 2000 शराब की बोतलें
- 100 गर्भपात के इंजेक्शन
- 50 हजार हड्डियों के टुकड़े
- 10 हजार सिगरेट
- 4 हजार बीड़ी
- और अन्य ‘अश्लील गतिविधियां’ होती हैं।
उनके इस बयान की चारों तरफ से आलोचना हुई थी, लेकिन आहूजा अपने बयान पर अड़े रहे और बोले कि “मैं सच बोल रहा हूं, JNU में अश्लीलता और देशविरोधी गतिविधियों का अड्डा बन चुका है।”
राजनीति में आग लगाने की पुरानी आदत?
ज्ञानदेव आहूजा की छवि एक फायरब्रांड नेता की रही है, जो अक्सर विवादित बयान देकर चर्चा में रहते हैं। चाहे JNU का मामला हो या अब मंदिर शुद्धिकरण, आहूजा हमेशा सुर्खियों में रहे हैं।
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके बयान जानबूझकर सियासी लाभ के लिए दिए जाते हैं, ताकि एक खास वर्ग को लुभाया जा सके।
कांग्रेस का हमला तेज, दलित कार्ड खेला
कांग्रेस इस पूरे मामले को जातीय राजनीति से जोड़ रही है। पार्टी की ओर से साफ तौर पर कहा गया कि “BJP दलितों का अपमान कर रही है, यह सिर्फ मंदिर का नहीं, संविधान का अपमान है।”
प्रदेश भर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए, आहूजा का पुतला जलाया गया, और अलवर में कई जगहों पर धरने-प्रदर्शन भी हुए।
क्या इस विवाद का असर पड़ेगा चुनावों पर?
राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और ऐसे में ये घटनाएं बेहद महत्वपूर्ण हो जाती हैं। कांग्रेस इसे दलितों की अस्मिता से जोड़कर वोटबैंक मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं BJP इसे व्यक्तिगत बयान बताकर पीछे हट रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मुद्दे चुनावी हवा को बदल सकते हैं, खासकर जब बात जातीय समीकरणों की हो।
निष्कर्ष: क्या ज्ञानदेव आहूजा एक सोची-समझी साजिश के तहत बयान देते हैं?
इस पूरे प्रकरण से एक बात तो साफ है कि ज्ञानदेव आहूजा को विवादों में रहना पसंद है या उनकी राजनीति की शैली ही ऐसी है। कभी JNU में कंडोम और शराब की बोतलें, तो कभी मंदिर में गंगाजल से शुद्धिकरण – हर बार उनके बयान समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाते हैं।
लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ऐसे नेता लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं या फिर समाज में बांटने का काम कर रहे हैं?











