तकनीक ने इंसान की जिंदगी को जितना आसान बनाया है, उतना ही कभी-कभी यह जानलेवा भी साबित हो रही है। ऐसा ही एक मामला गोरखपुर से सामने आया है, जहां गूगल मैप की एक गलती ने एक शख्स को सीधे मौत के मुंह में पहुंचा दिया। अगर ट्रेन ड्राइवर की सजगता न होती, तो यह घटना एक बड़े हादसे में तब्दील हो सकती थी। यह कहानी है बिहार के गोपालगंज के रहने वाले आदर्श राय की, जो गूगल मैप के भरोसे घर लौटते वक्त रेलवे ट्रैक पर जा पहुंचे।
रात के अंधेरे में गूगल मैप बना मुसीबत
आदर्श राय सोमवार देर रात गोरखपुर से अपने गांव गोपालपुर (गोपालगंज, बिहार) के लिए निकले थे। रास्ता भटकने से बचने के लिए उन्होंने गूगल मैप का सहारा लिया। मैप में “गोपालपुर विलेज” डालते ही उन्हें एक रास्ता दिखाई दिया। लेकिन गूगल मैप ने उन्हें गोपालगंज के गोपालपुर की बजाय गोरखपुर के डोमिनगढ़ इलाके में बसे एक अन्य गोपालपुर का रास्ता दिखा दिया। नतीजा यह हुआ कि रात के अंधेरे में मैप पर भरोसा करते हुए आदर्श अपनी कार (BR 01 HQ 4957) सहित रेलवे ट्रैक पर जा चढ़े।
मौत से महज चंद सेकंड की दूरी
रात करीब 1 बजे उनकी कार ट्रैक के किनारे बिछे बैलास्ट (पत्थरों) में फंस गई। अंधेरा होने की वजह से उन्हें रेलवे ट्रैक का अंदाजा नहीं हुआ। इसी बीच, सहजनवा से गोरखपुर की ओर आ रही एक टैंकर मालगाड़ी उनकी ओर बढ़ रही थी। गनीमत रही कि मालगाड़ी के लोको पायलट की नजर कार पर पड़ गई। उसने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया, जिससे कार महज कुछ सेकंड की दूरी पर ट्रेन से टकराने से बच गई। हादसे के बाद आदर्श की रूह कांप गई। वे नशे में थे और ट्रैक पर फंसने के बावजूद कार से बाहर नहीं निकले।
एक घंटे तक ठप रहा ट्रैक
इस घटना के बाद रेलवे ट्रैक करीब एक घंटे तक बाधित रहा। मालगाड़ी रात 2 बजे तक वहीं खड़ी रही। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) मौके पर पहुंचा और कार को ट्रैक से हटाया। आदर्श को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। मेडिकल जांच में उनके नशे में होने की पुष्टि हुई। RPF ने उनके खिलाफ रेल अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया और चालान कर कोर्ट में पेश किया। हालांकि, कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन उनकी कार को जब्त कर लिया गया।
तकनीक का दोहरा चेहरा
गूगल मैप ने जहां लाखों लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, वहीं इस तरह की घटनाएं इसके खामियों को भी उजागर करती हैं। बीते साल नवंबर में एक कार चालक गूगल मैप के गलत रास्ते के चलते अधूरे पुल से नीचे गिर गया था। गोरखपुर की यह घटना भी तकनीक पर अंधविश्वास के खतरे को सामने लाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मैप का इस्तेमाल करते वक्त आसपास के हालात पर भी नजर रखना जरूरी है।
निष्कर्ष
आदर्श राय की यह कहानी एक सबक है कि तकनीक भले ही मददगार हो, लेकिन उस पर पूरी तरह भरोसा करना जानलेवा हो सकता है। अगर ट्रेन ड्राइवर ने सूझबूझ न दिखाई होती, तो गूगल मैप का यह “यमराज का घर” सचमुच आदर्श के लिए अंतिम पड़ाव बन जाता। अब सवाल यह है कि क्या तकनीक की ऐसी खामियों को दूर करने की जिम्मेदारी सिर्फ यूजर्स की है, या फिर कंपनियों को भी कदम उठाने चाहिए?













