Business Story: भारत की दूसरी सबसे बड़ी होटल चेन ओबेरॉय ग्रुप की कहानी प्रेरणा से भरी हुई है। इसकी स्थापना मोहन सिंह ओबेरॉय ने की थी, जिन्हें भारतीय होटल इंडस्ट्री का पायनियर माना जाता है। उन्होंने शून्य से शुरुआत कर 31 लग्जरी होटलों का साम्राज्य खड़ा कर दिया। लेकिन यह सफर इतना आसान नहीं था। उन्होंने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर अपना पहला होटल खरीदा था।
ओबेरॉय ग्रुप: एक नजर में
स्थापना: मोहन सिंह ओबेरॉय
पहला होटल: क्लार्क होटल, शिमला
वर्तमान होटल्स: भारत, इंडोनेशिया, मिस्र, यूएई, मॉरीशस, सऊदी अरब में 31 होटल
मार्केट कैप: 25,000 करोड़ रुपये
कर्मचारी: 12,000 से अधिक
शून्य से शुरुआत: जब जेब में पैसे नहीं थे
मोहन सिंह ओबेरॉय का जन्म 1898 में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई रावलपिंडी में हुई और बैचलर डिग्री के लिए वे लाहौर गए। लेकिन उनका सपना कुछ बड़ा करने का था, जिसके लिए वे शिमला पहुंचे।
जब शिमला आए, तो जेब में पैसे तक नहीं थे। किसी तरह सेसिल होटल में क्लर्क की नौकरी मिली, जहां उन्हें सिर्फ 50 रुपये महीना सैलरी मिलती थी। लेकिन उनकी मेहनत और सीखने की इच्छा ने होटल के अंग्रेज मैनेजर को प्रभावित किया। वह सिर्फ क्लर्क की ड्यूटी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि होटल के हर काम में दिलचस्पी लेने लगे।
पत्नी के गहने गिरवी रखकर खरीदा पहला होटल
कुछ सालों बाद, होटल के मैनेजर ने एक छोटा होटल खरीदा और मोहन सिंह को पार्टनर बनने का मौका दिया। 1934 में, मोहन सिंह ओबेरॉय ने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर “क्लार्क होटल” खरीदा। यही से उनकी बिजनेस जर्नी शुरू हुई।
इसके बाद, 1938 में उन्होंने कोलकाता में 500 कमरों वाला “ग्रैंड होटल” लीज पर लिया। उस समय यह होटल घाटे में था, लेकिन उनकी कड़ी मेहनत ने इसे लाभदायक बिजनेस में बदल दिया।
Business Story: भारत की सबसे बड़ी होटल चेन पर कब्जा
धीरे-धीरे उन्होंने “एसोसिएटेड होटल्स ऑफ इंडिया (AHI)” के शेयरों में निवेश करना शुरू किया, जिसके पास दिल्ली, लाहौर, पेशावर और शिमला में कई होटल थे।
1943 में, उन्होंने AHI के कंट्रोलिंग शेयर खरीद लिए और भारत की सबसे बड़ी होटल चेन के मालिक बन गए। वे यह उपलब्धि हासिल करने वाले भारत के पहले व्यक्ति थे।
भारत का पहला इंटरनेशनल होटल और 35 मंजिला होटल
Business Story: 1965 में, उन्होंने नई दिल्ली में भारत का पहला इंटरनेशनल होटल “द ओबेरॉय इंटरकॉन्टिनेंटल” खोला।
इसके बाद, 1973 में मुंबई में 35 मंजिला “ओबेरॉय शेरेटन” बनाकर सफलता को नई ऊंचाई दी।
ग्लोबल ब्रांड बनने की कहानी
मोहन सिंह ओबेरॉय ने सिर्फ भारत तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ग्लोबल होटल ब्रांड्स के साथ पार्टनरशिप की।
उनकी लीडरशिप में ओबेरॉय ग्रुप ने अपना दूसरा होटल ब्रांड “ट्राइडेंट” लॉन्च किया।
आज भारत और विदेशों में:
मुंबई, चेन्नई, गुरुग्राम, हैदराबाद, भुवनेश्वर, आगरा, जयपुर, उदयपुर में ट्राइडेंट होटल
सऊदी अरब (जेद्दा) में भी इंटरनेशनल ट्राइडेंट होटल
12,000 लोगों को रोजगार देने वाला होटल साम्राज्य
आज ओबेरॉय ग्रुप दुनियाभर में 12,000 से ज्यादा कर्मचारियों को रोजगार देता है।
मोहन सिंह ओबेरॉय ने सिर्फ होटल नहीं बनाए, बल्कि इंडियन हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को वैश्विक पहचान दिलाई। 2002 में, 103 साल की उम्र में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी जिंदा है।
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