Rajasthan New Districts: राजस्थान सरकार ने बजट 2025-26 में नवगठित 8 जिलों में क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (Kray Vikray Sahakari Samiti – KVSS) की स्थापना का निर्णय लिया है। यह पहल किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उन्हें समय पर खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और अपनी फसलें समर्थन मूल्य पर बेचने की सुविधा मिलेगी। राज्य सरकार ने सहकारिता विभाग को इस निर्णय को जल्द से जल्द लागू करने के निर्देश दिए हैं।
किन जिलों में होगी सहकारी समितियों की स्थापना
राज्य सरकार ने डीग, ब्यावर, बालोतरा, डीडवाना, फलौदी, सलूबर, खेरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों में नई क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के गठन को मंजूरी दी है। (Rajasthan New Districts) सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया को लेकर कार्यालय रजिस्ट्रार सहकारी समितियां ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
डीग जिले की पहाड़ी पंचायत समिति में पहली बार क्रय-विक्रय सहकारी समिति की स्थापना की जाएगी। इससे किसानों को समय पर खाद-बीज की उपलब्धता के साथ-साथ समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने की सुविधा भी मिलेगी। अभी तक जिले में डीग, कुहेर, नगर और कामां पंचायत समितियों में यह सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन पहाड़ी पंचायत समिति इससे वंचित थी।
सहकारी समिति गठन के लिए निर्धारित मापदंड
Rajasthan New Districts: सरकार ने सहकारी समितियों के गठन के लिए कुछ आवश्यक मापदंड तय किए हैं। इन मापदंडों के अनुसार ही नई समितियों की स्थापना की जाएगी:
- स्थान चयन: नई क्रय-विक्रय सहकारी समिति का गठन पंचायत समिति या तहसील मुख्यालय पर किया जाना चाहिए।
- बैंक उपलब्धता: प्रस्तावित स्थान पर केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB) या अन्य वाणिज्यिक बैंक की शाखा का होना आवश्यक है।
- कृषि क्षेत्र: समिति के कार्यक्षेत्र में दो फसल क्षेत्र या सिंचित भूमि का अधिक होना आवश्यक है।
- सड़क एवं संचार सुविधा: प्रस्तावित समिति का क्षेत्र यातायात और दूरसंचार सुविधाओं से जुड़ा होना चाहिए।
- भूखंड की उपलब्धता: गोदाम और कार्यालय निर्माण के लिए पर्याप्त भूखंड होना चाहिए।
- किसानों की भागीदारी: कम से कम 300 किसानों को व्यक्तिगत सदस्य के रूप में जोड़ा जा सके।
- ग्राम सेवा समितियों की संख्या: प्रस्तावित समिति के कार्यक्षेत्र में कम से कम 15 ग्राम सेवा समितियां होनी चाहिए।
- आवेदन प्रक्रिया: नई सहकारी समिति के गठन के लिए आवेदन पत्र कम से कम 50 प्रस्तावित सदस्यों द्वारा प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
- सर्वेक्षण रिपोर्ट: सहकारी समिति की स्थापना से पहले एक आधिकारिक सर्वे रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें क्षेत्र की कृषि स्थिति, खाद-बीज की मांग और किसानों की संख्या का विवरण होगा।
- अन्य समितियों पर प्रभाव: नई समिति के गठन से आसपास की अन्य सहकारी समितियों के कार्यक्षेत्र पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
Rajasthan New Districts: सहकारी समिति गठन से किसानों को मिलने वाले लाभ
राज्य सरकार की इस पहल से किसानों को कई बड़े फायदे मिलेंगे।
- खाद-बीज की समय पर उपलब्धता: नई समितियों के गठन से किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
- समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री: किसानों को अब अपनी फसल बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें अपने ही जिले में उचित मूल्य पर उपज बेचने की सुविधा मिलेगी।
- बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी: किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिलेगा और बिचौलियों का प्रभाव कम होगा।
- कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: सहकारिता मॉडल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती: सहकारी समितियों की स्थापना से गांवों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
- कृषि उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग: किसान अपने उत्पादों को बड़े स्तर पर बाजार में बेच सकेंगे।
राज्य सरकार की आगामी योजनाएं
Rajasthan New Districts: राजस्थान सरकार सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई नई योजनाएं लागू करने की तैयारी कर रही है। सहकारिता विभाग इस प्रक्रिया को तेज गति से लागू करने के लिए संबंधित अधिकारियों से लगातार संवाद कर रहा है। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि सहकारी समितियों के गठन में किसी तरह की प्रशासनिक देरी न हो और किसानों को जल्द से जल्द इनका लाभ मिले।
राज्य सरकार का यह निर्णय राजस्थान के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाला साबित होगा। इससे किसानों को न केवल आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि वे अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर भी बन सकेंगे।











