जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की ऐतिहासिक जलमहल झील की बदहाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए नगर निगम जयपुर हैरिटेज को फटकार लगाई है। अदालत ने सवाल किया कि अगर Jalmahal Rajasthan को नष्ट कर दिया गया तो जयपुर को स्मार्ट सिटी कैसे बनाया जाएगा? साथ ही, कोर्ट ने झील के आसपास रात्री बाजार और वेंडिंग गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
Jalmahal Rajasthan की सुरक्षा के लिए सख्त निर्देश
कोर्ट ने आदेश दिया कि झील में सीवरेज और अन्य गंदगी के प्रवाह को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके लिए सीएसआईआर-नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) के विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को 7 मार्च तक स्थगित कर दिया और नगर निगम को 21 मार्च तक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा।
नगर निगम के जवाब से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट
न्यायाधीश अभय एस ओका और उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक नीरी की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक Jalmahal Rajasthan के पर्यटन विकास से जुड़ी किसी भी योजना को लागू न किया जाए। नगर निगम जयपुर हैरिटेज के आयुक्त अरुण हसीजा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया, लेकिन उनके जवाब से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ।
रात्रि बाजार विवाद की पृष्ठभूमि
मई 2022 में, नगर निगम जयपुर हैरिटेज ने Jalmahal Rajasthan के पास रात्रि बाजार संचालित करने के लिए निविदा जारी की थी। यह बाजार नाहरगढ़ अभयारण्य के ईको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) के नियमों का उल्लंघन करता पाया गया। इसके खिलाफ राजेंद्र तिवाड़ी द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में शिकायत दर्ज कराई गई। जुलाई 2023 में एनजीटी ने बाजार को अवैध घोषित कर दिया और नगर निगम पर 26.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इस फैसले को नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
नीरी को पर्यावरणीय बहाली के सुझाव देने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने नीरी को यह निर्देश दिया है कि वह Jalmahal Rajasthan को हुए पर्यावरणीय नुकसान को खत्म करने और उसे पूर्व स्थिति में लाने के उपायों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
स्मार्ट सिटी पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब नगर निगम के आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े तो उनकी कुर्सी के पीछे ‘स्मार्ट सिटी’ का बैनर लगा हुआ था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि Jalmahal Rajasthan जैसी ऐतिहासिक झील को नष्ट कर दिया जाएगा, तो जयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने की बात कैसे की जा सकती है?
पत्रकारिता का असर: पत्रिका ने उठाया मुद्दा
राजस्थान पत्रिका ने Jalmahal Rajasthan के संरक्षण और उसके बिगड़ते हालात को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की हैं। इस विषय पर नगर निगम की लापरवाही और मिलीभगत को उजागर किया गया, जिसके चलते कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया।
अजमेर वेटलैंड प्रकरण: मुख्य सचिव सुप्रीम कोर्ट में तलब
सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत वेटलैंड बहाली से जुड़े आदेशों के अनुपालन में देरी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव को 17 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का आदेश दिया है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख से यह स्पष्ट होता है कि राजस्थान की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय धरोहरों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। Jalmahal Rajasthan को बचाने के लिए नगर निगम को ठोस कदम उठाने होंगे, अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।











