Jaipur News : अलवर में चमके जयपुर के ताइक्वांडो स्टार्स — गोल्ड की बारिश! – जयपुर के ताइक्वांडो सितारों ने अलवर में लहराया परचम: विवान, तपस्या, उदित और अंशु ने जीते गोल्ड मेडल!

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Jaipur News : राजस्थान के खेल जगत में जयपुर के युवाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत, समर्पण और सही प्रशिक्षण से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
एस.एस. प्रो ताइक्वांडो एकेडमी के खिलाड़ियों ने अलवर में आयोजित सरिस्का ओपन ताइक्वांडो प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड और सिल्वर मेडल्स की झड़ी लगा दी।

इस दो दिवसीय प्रतियोगिता का आयोजन 26 जुलाई को हुआ था, जिसमें राजस्थान के करीब 500 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया।

Jaipur News : गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ी

  • विवान जैन
  • तपस्या सिंह
  • उदितवीर सिंह
  • अंशु प्रजापति

इन चारों खिलाड़ियों ने न केवल बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन किया, बल्कि हर मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा और गोल्ड मेडल जीतकर जयपुर का नाम रोशन किया।

सिल्वर मेडल विजेता:

  • भूमिका चौधरी
  • अमर शर्मा

इन दोनों खिलाड़ियों ने भी जबरदस्त जज्बे के साथ मुकाबले लड़े और अंतिम चरण तक पहुंचकर सिल्वर मेडल अर्जित किया।

कोच शुभम शर्मा का मार्गदर्शन बना सफलता की चाबी

इन सभी खिलाड़ियों की सफलता का श्रेय जाता है एस.एस. प्रो ताइक्वांडो एकेडमी, सिरसी रोड जयपुर के कोच और संस्थापक श्री शुभम शर्मा को, जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके इन बच्चों को तकनीकी तौर पर तैयार किया।

कोच शुभम शर्मा का कहना है:

“हमारी एकेडमी का मकसद सिर्फ मेडल जीतना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और आत्मरक्षा की भावना को बढ़ाना है।”

विजेताओं का सम्मान

इस मौके पर प्रतियोगिता में मौजूद राजस्थान ताइक्वांडो संघ के अध्यक्ष श्री उत्तम सैनी और जिला अध्यक्ष श्री अभिनव गुप्ता ने विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उनकी सफलता की सराहना की।

उन्होंने कहा:

“इन युवाओं की मेहनत और कोच शुभम शर्मा का समर्पण आने वाली पीढ़ियों को खेलों की ओर आकर्षित करेगा। ताइक्वांडो न केवल एक खेल है, बल्कि यह आत्मरक्षा और आत्मसंयम का भी प्रतीक है।”

प्रतियोगिता का आयोजन और भागीदारी

  • यह दो दिवसीय प्रतियोगिता अलवर जिला ताइक्वांडो संघ द्वारा आयोजित की गई थी।
  • आयोजन सचिव रजनीश जैमन के अनुसार, इसमें राजस्थान के कोने-कोने से आए 500 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया।
  • प्रतियोगिता में फ्रेशर, सब-जूनियर, कैडेट, जूनियर और सीनियर वर्ग के मुकाबले आयोजित किए गए।

आत्मरक्षा के प्रति बढ़ता रुझान

ताइक्वांडो जैसे खेल आज सिर्फ मेडल तक सीमित नहीं हैं। वर्तमान समय में आत्मरक्षा का महत्व बढ़ता जा रहा है, और ऐसे में बच्चों को इस दिशा में प्रशिक्षित करना न केवल उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी देता है।

ग्राउंड रिपोर्ट: मुकाबलों की झलक

प्रतियोगिता स्थल पर बच्चों के चेहरे पर आत्मविश्वास और जीतने की ललक साफ झलक रही थी।
गोल्ड मेडल जीतने वाले विवान जैन के पिता का कहना है:

“हमने कभी नहीं सोचा था कि विवान इतना बड़ा मेडल जीतकर आएगा। यह सब कोच की मेहनत और विवान की लगन का नतीजा है।”

वहीं तपस्या सिंह की मां ने कहा:

“ताइक्वांडो ने मेरी बेटी को आत्मनिर्भर बनाया है। अब वह हर चुनौती का सामना आत्मविश्वास से करती है।”

स्थानीय जनता और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

प्रतियोगिता के बाद जयपुर लौटे खिलाड़ियों का एकेडमी और मोहल्ले में जोरदार स्वागत किया गया।
स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने कहा कि:

“ऐसे टूर्नामेंट्स से बच्चों को केवल मेडल नहीं मिलता, बल्कि वे अनुशासन, मेहनत और समर्पण जैसे जीवन मूल्यों को भी अपनाते हैं।”

जयपुर बन रहा है ताइक्वांडो का हब

राजधानी जयपुर में अब कई ताइक्वांडो एकेडमियाँ सक्रिय हैं, जो बच्चों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग दे रही हैं।
एस.एस. प्रो ताइक्वांडो एकेडमी इन्हीं में से एक प्रमुख नाम बनकर उभरी है।

यह एकेडमी:

  • हफ्ते में 6 दिन ट्रेनिंग देती है
  • बच्चों को बेल्ट टेस्ट, टूर्नामेंट्स और फिटनेस सेशन में प्रशिक्षित करती है
  • आत्मरक्षा पर विशेष ध्यान देती है, खासकर छात्राओं के लिए

निष्कर्ष: ताइक्वांडो से सिर्फ मेडल नहीं, आत्मबल मिलता है

विवान, तपस्या, उदित, अंशु, भूमिका और अमर ने अपने संघर्ष और समर्पण से जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे आने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

इन बच्चों ने साबित कर दिया कि अगर सही कोच, सही माहौल और लगन हो, तो कोई भी मुकाम असंभव नहीं।

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