Son Killed Parents/मयूरभंज, ओडिशा: क्या आप सोच सकते हैं कि एक बेटा अपने बुजुर्ग मां-बाप की न सिर्फ हत्या कर दे, बल्कि उनकी लाशों के पास पूरी रात चैन से सोता भी रहे? ऐसा ही खौफनाक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है ओडिशा के मयूरभंज ज़िले से, जहाँ 55 साल के एक ऑटो ड्राइवर बेटे ने शराब के नशे में अपने 81 वर्षीय पिता और 72 वर्षीय मां की हथौड़े से पीट-पीटकर हत्या कर दी।
इस वारदात ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि शराब की लत किस हद तक इंसान को हैवान बना देती है।
Son Killed Parents : क्या है पूरा मामला?
यह मामला मयूरभंज के एक छोटे से गांव का है, जहाँ रहने वाला हिमांशु साहू ऑटो ड्राइवर है। 55 वर्षीय हिमांशु अक्सर शराब के नशे में धुत रहता था और आए दिन अपने माता-पिता से झगड़ता था।
घटना वाली रात भी हिमांशु नशे में था। गुस्से और झुंझलाहट में उसने घर में रखा भारी हथौड़ा उठाया और अपने पिता हादीबंधु साहू (81) और मां शांति साहू (72) पर एक के बाद एक कई बार वार कर दिया।
इतना ही नहीं, हत्या के बाद वह उनके शवों के बगल में चारपाई पर लेट गया और वहीं सो गया – जैसे कुछ हुआ ही न हो।
सुबह का मंजर था दिल दहला देने वाला
अगली सुबह जब पड़ोसियों ने घर का दरवाजा खटखटाया और कोई जवाब नहीं मिला, तो खिड़की से झांककर जो देखा, उसने सभी के होश उड़ा दिए। बुजुर्ग दंपति बेजान पड़े थे और उनका बेटा हिमांशु उनके शवों के पास बैठा था।
पड़ोसियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। स्थानीय पुलिस थाना से पुलिस मौके पर पहुँची, और हिमांशु को हिरासत में ले लिया गया। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए PRM मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल, बारीपदा भेजा गया है।
पुलिस जांच जारी, हत्या की वजह निजी विवाद
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि हत्या के पीछे पारिवारिक विवाद और शराब की लत मुख्य कारण हैं। हिमांशु पहले से ही मानसिक तनाव और शराब के नशे में रहने की वजह से असंतुलित व्यवहार करता था।
पुलिस अब हिमांशु की मानसिक स्थिति, पारिवारिक बैकग्राउंड और वित्तीय स्थिति की भी जांच कर रही है।
बीवी और बच्चे पहले ही छोड़ चुके थे साथ
सूत्रों के अनुसार, हिमांशु की पत्नी और बच्चे पहले ही उसे छोड़ चुके थे, क्योंकि वह आए दिन शराब पीकर झगड़ा करता था। वह पिछले कई महीनों से अकेला ही माता-पिता के साथ रह रहा था। पड़ोसियों का कहना है कि उसके ऊपर कई कर्ज भी थे और वह मानसिक रूप से परेशान भी रहता था।
बीमा और लोन जैसे विकल्पों की जानकारी न होना बना भारी
इस तरह की घटनाएं यह भी उजागर करती हैं कि यदि परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो और सही समय पर सरकारी योजनाओं, बीमा और लोन सुविधा की जानकारी हो, तो शायद तनाव की ऐसी नौबतें कम हों।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और आयुष्मान भारत योजना जैसे विकल्पों की जानकारी और लाभ यदि हर नागरिक तक समय पर पहुँचे, तो शायद इस तरह की पारिवारिक त्रासदियों से बचा जा सके।
ओडिशा पुलिस का बयान
स्थानीय थाना प्रभारी ने बताया,
“यह बेहद दर्दनाक घटना है। हम इस मामले में हर पहलू से जांच कर रहे हैं, चाहे वह मानसिक स्वास्थ्य हो या घरेलू विवाद। आरोपी से पूछताछ जारी है और मेडिकल परीक्षण भी करवाया जा रहा है।”
क्या इस घटना से हम कुछ सीख सकते हैं?
इस घटना ने एक बार फिर समाज को आईना दिखाया है कि नशा और पारिवारिक तनाव का घातक मेल किस हद तक तबाही ला सकता है।
सरकार, समाज और परिवारों को मिलकर ऐसे मुद्दों पर काम करना होगा। जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग और आर्थिक सहयोग ही इन घटनाओं को रोकने का उपाय है।













