Haryana Crime News : “बस इतना कहा- बाइक ठीक से चलाओ… और शराब की बोतल लड़की के मुंह पर फोड़ दी! 17 साल की छात्रा की हालत देख दहल गए लोग”

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Haryana Crime News : हरियाणा के नूंह में 17 साल की स्कूटी सवार लड़की से दो लड़कों की ऐसी हरकत कि जान भी जा सकती थी। शराब की बोतल उसके मुंह पर फोड़ दी गई, 35 टांके आए। पुलिस का रवैया हैरान करने वाला रहा। जानिए पूरा मामला।

नूंह से आई हैरान कर देने वाली वारदात

हरियाणा के नूंह जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। एक 17 साल की छात्रा जब अपनी स्कूटी से घर लौट रही थी, तब दो मनचलों ने उसे ऐसा जख्म दे दिया जो उसकी पूरी जिंदगी का दर्द बन गया। महज एक छोटी-सी बात पर गुस्साए लड़कों ने लड़की के मुंह पर शराब की बोतल फोड़ दी, जिससे उसके चेहरे पर 35 टांके आए और तीन दांत टूट गए।

Haryana Crime News: क्या हुआ था उस शाम?

घटना 12 जुलाई की है, शाम करीब 7:45 बजे। नूंह के रोजका मेव थाना क्षेत्र के आटा-बारोटा गांव की रहने वाली दीपाली सिंह, अपने पड़ोस के दो छोटे बच्चों के साथ स्कूटी पर सवार होकर दूध लेने निकली थी। जब वह लौट रही थी, तब बारोटा रोड पर दो युवक अपनी बाइक से स्कूटी के आगे-पीछे घूमते हुए उसे परेशान करने लगे।

दीपाली ने सिर्फ इतना कहा, “बाइक ढंग से चलाओ”, लेकिन यह बात उन दोनों को इतनी बुरी लगी कि उन्होंने कुछ ही पलों में इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं।

बोतल फोड़ने से टूटा जबड़ा और खून में लथपथ हुई छात्रा

दोनों युवकों ने अपनी बाइक रोक दी और अचानक शराब से भरी कांच की बोतल दीपाली के चेहरे पर दे मारी। इस हमले में दीपाली के तीन दांत टूट गए, चेहरे से खून बहने लगा और वो स्कूटी से गिर पड़ी। छोटे बच्चे भी डर के मारे रोने लगे। हमलावर वहां से फरार हो गए।

घर पहुंची तो मां-बाप की चीख निकल गई

दीपाली किसी तरह खुद को संभालते हुए खून से लथपथ हालत में घर पहुंची। उसका चेहरा देख उसके माता-पिता सन्न रह गए। आनन-फानन में उसे सोहना के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे नल्हड़ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।

डॉक्टरों ने दीपाली के चेहरे पर 35 टांके लगाए, उसकी हालत देखकर डॉक्टर भी सिहर उठे।

पुलिस ने दिखाई बेरुखी: “14 जुलाई को यात्रा है, बाद में आना”

दीपाली के पिता विनय सिंह ने 13 जुलाई की सुबह रोजका मेव थाने में जाकर शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कहा कि 14 जुलाई को ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा है, इसलिए 15 जुलाई को आना। जब वे 15 जुलाई को फिर पहुंचे तो एक पुलिसकर्मी अनिल ने कहा, “कोर्ट जाना है, टाइम नहीं है, शाम को देखेंगे।”

मीडिया बुलाई, तब जाकर पुलिस हिली

जब कई बार जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो परिजनों ने थाने में हंगामा किया और मीडिया को बुलाने की बात कही। तब जाकर पुलिस घटनास्थल पर जाने को तैयार हुई।

दीपाली की मां नेहा ने बताया कि वे घायल बेटी को लेकर घंटों थाने में बैठे रहे, लेकिन पुलिस ने न तो कोई रिपोर्ट लिखी और न कोई कार्रवाई की।

अब सवाल उठते हैं…

  • क्या लड़कियों की सुरक्षा अब बस चुनावी वादों तक सीमित रह गई है?
  • एक नाबालिग लड़की के साथ इतनी गंभीर वारदात और पुलिस की ढिलाई क्या एक बड़ी लापरवाही नहीं?
  • जब तक कैमरे ना हों, क्या कानून की गाड़ी आगे नहीं बढ़ती?

निष्कर्ष

नूंह की यह घटना किसी एक दीपाली की नहीं है, यह देश की हर लड़की की सुरक्षा पर सवाल उठाती है। क्या हम एक ऐसा समाज बनाना चाहते हैं जहां एक लड़की “बाइक ठीक से चलाओ” कहने की भी हिम्मत न कर सके?

अब वक्त आ गया है कि समाज और प्रशासन दोनों को जागना होगा। पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए और अपराधियों को कड़ी सजा।

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