Rajasthan Roadways Salary Fraud :
झुंझुनूं से उठी भ्रष्टाचार की गंध, सैलरी लेते रहे बिना काम किए
राजस्थान सरकार के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन विभाग, रोडवेज में एक चौंका देने वाला घोटाला सामने आया है। झुंझुनूं डिपो में दर्जनों कर्मचारी और अधिकारी वर्षों तक ड्यूटी पर नहीं आए, फिर भी उन्हें हर महीने समय पर वेतन मिलता रहा। और यह सब कुछ हुआ, अधिकारियों की मिलीभगत से।
आपको जानकर हैरानी होगी कि यह खेल कई सालों से चल रहा था, लेकिन न कोई आवाज़ उठा, न किसी ने सवाल किया। आखिरकार जब एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने शिकायत की जांच की सिफारिश की, तो पूरा घोटाला उजागर हुआ।
24 कर्मचारियों पर एक साथ गिरी गाज, बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप
रोडवेज प्रशासन ने जब जांच करवाई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एक साथ 24 अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया। इनमें मुख्य प्रबंधक, चार विभाग प्रमुख, 11 कंडक्टर, 5 ड्राइवर और दो बाबू शामिल हैं।
यह पहली बार हुआ है जब रोडवेज ने इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कर्मचारियों को सस्पेंड किया है।
सेवानिवृत्त और स्थानांतरित अधिकारी भी घोटाले में शामिल
इस घोटाले की परतें जब खुलीं, तो यह बात भी सामने आई कि सिर्फ वर्तमान कर्मचारी ही नहीं, बल्कि सेवानिवृत्त और स्थानांतरित अधिकारी भी इस खेल का हिस्सा रहे हैं।
रोडवेज ने सात सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चार्जशीट जारी की है। इसके अलावा, साल 2020 से अब तक झुंझुनूं डिपो में कार्यरत रहे सभी प्रबंधकों को भी 16 CCA के तहत नोटिस दिया गया है।
घोटाले की जड़ में कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
इस पूरे घोटाले की सबसे बड़ी बात यह रही कि कर्मचारी ड्यूटी पर आते ही नहीं थे, लेकिन वेतन हर महीने उनके खाते में पहुंचता रहा।
कुछ मामलों में तो कर्मचारी 2-3 साल से गायब थे, लेकिन उनका नाम हाजिरी रजिस्टर में मौजूद था। इससे साफ है कि अधिकारियों ने खुद जानबूझकर इन अनुपस्थित कर्मचारियों को बचाया और उन्हें सैलरी ट्रांसफर करवाई।
भरतपुर में ड्राइवर को बर्खास्त किया गया
रोडवेज प्रशासन ने झुंझुनूं घोटाले के बाद भ्रष्ट कर्मचारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। भरतपुर के लोहागढ़ डिपो के ड्राइवर भगवान सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
उन पर आरोप था कि वह रोजाना 20 यात्रियों को बिना टिकट यात्रा करवाते थे। जांच में यह आरोप सही पाए गए और उन्हें तुरंत बर्खास्त कर दिया गया। उनका निलंबन काल का वेतन भी जब्त कर लिया गया है।
ऐसे और कितने डिपो में चल रहा है ‘फ्री सैलरी’ घोटाला?
झुंझुनूं जैसा ही मामला कई और डिपो में भी सामने आ चुका है। कई कंडक्टर-ड्राइवर अपनी जगह दूसरों को भेजते हैं, और खुद बैठे-बैठे सैलरी लेते हैं। लेकिन अब रोडवेज अध्यक्ष शुभ्रा सिंह ने साफ संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार और मिलीभगत किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, करीब 15 और ड्राइवर-कंडक्टर ऐसे हैं जिन पर कार्रवाई हो सकती है। आने वाले दिनों में और भी बर्खास्तगियों की संभावना है।
राज्य सरकार के लिए चेतावनी की घंटी
इस पूरे मामले ने राज्य सरकार और रोडवेज प्रशासन के सामने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या हमारी व्यवस्था इतनी लचीली हो चुकी है कि कोई भी सालों तक बिना काम किए तनख्वाह उठा सकता है?
अगर समय रहते कड़ा एक्शन न लिया गया तो यह भ्रष्टाचार अन्य विभागों में भी पनप सकता है। इसीलिए इस प्रकार की घटनाएं सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सिस्टम में सुधार की मांग करती हैं।
निष्कर्ष: जनता का पैसा कोई मज़ाक नहीं
रोडवेज घोटाला हमें यह सिखाता है कि सरकारी धन यानी जनता का पैसा, और उसका दुरुपयोग किसी भी हाल में माफ़ नहीं किया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि झुंझुनूं की इस बड़ी कार्रवाई के बाद क्या राजस्थान रोडवेज के अन्य डिपो भी इस तरह की सफाई के लिए तैयार होंगे या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।











