3 January Panchang: आज के दिन का पंचांग के साथ दिन की पूरी कुंडली, साथ ही जीवन में हवन और आहुति क्यों ज़रूरी है इनसे जीवन में क्या लाभ होता है और भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार जानकारी शास्त्रों में भी दी गई है आज के दिन का शुभ मुहूर्त और राहु काल के बारे में दी गई है जिन्हें उपयोग करके आप अपने दिन को और मंगल और शुभ बनाए..आइए जानते है क्या है पूरी जानकारी…अधिक पढ़े.
3 January Panchang: ~ हिन्दू पंचांग ~🌞
दिनांक – 03 जनवरी 2025
दिन – शुक्रवार
विक्रम संवत् – 2081
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शिशिर
मास – पौष
पक्ष – शुक्ल
तिथि – चतुर्थी रात्रि 11:39 तक, तत्पश्चात पञ्चमी
नक्षत्र – धनिष्ठा रात्रि 10:22 तक तत्पश्चात शतभिषा
योग – वज्र दोपहर 12:38 तक, तत्पश्चात सिद्धि
राहु काल – सुबह 11:24 से दोपहर 12:44 तक
सूर्योदय – 07:25
सूर्यास्त – 06:02
दिशा शूल – पश्चिम दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:35 से 06:28 तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:23 से दोपहर 01:06 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:18 जनवरी 04 से रात्रि 01:11 जनवरी 04 तक
व्रत पर्व विवरण – विनायक चतुर्थी
विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
3 January Panchang: हवन-यज्ञ क्यों होते है इनसे क्या लाभ है?
वैश्विक समस्याओं में जाति, मत, पंथ, देश के दायरों से परे होकर देखें तो जो विकराल समस्याएँ हैं उनमें से एक है वातावरण और वैचारिक प्रदूषण की समस्या । विभिन्न देशों द्वारा करोड़ों-अरबों डॉलर खर्च करके उपाय खोजे व किये जा रहे हैं परंतु यह समस्या वैसी ही बनी हुई है । इसके निवारण हेतु विश्व अब भारत की प्राचीन धरोहर यज्ञ-हवन की ओर एक आशाभरी नजर से देख रहा है। यह हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा चलायी गयी परम्परा है और समय-समय पर महापुरुषों द्वारा इसे सुविकसित व लोकसुगम्य बनाया गया है ।
कारखानों व गाड़ियों आदि के धुएँ से वातावरण दूषित होता है, जिससे फेफड़ों व श्वास के विभिन्न रोग होते हैं । यज्ञ-हवन दूषित वायुमंडल को तो शुद्ध करता ही है, साथ ही इससे मानसिक कुविचारों पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है ।
प्रज्वलित खाँड (अपरिष्कृत शक्कर) में वायु को शुद्ध करने की अत्यधिक शक्ति होती है । घी की आहुति से वातावरण शुद्धि तथा विभिन्न रोगों के कीटाणुओं का नाश होता है । अतः जिन स्थानों पर हवन होता है वहाँ फसल अच्छी होती है ।
श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ पूज्य बापूजी यज्ञ की उपयोगिता समझाते हुए कहते हैं : “तुम्हारे जीवन में यज्ञ के लिए भी स्थान होना चाहिए । श्रीकृष्ण बताते हैं : यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि… ‘सब प्रकार के यज्ञों में जपयज्ञ मैं हूँ।‘ (गीता : १०.२५)
परंतु आहुति देकर जो यज्ञ होते हैं, वे भी अच्छे हैं, उनका भी अपना महत्त्व है ।














